TMC ने दो विधायकों को किया निष्कासित, संदीपन साहा ने उठाए पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल
Kolkata : पश्चिम बंगाल की सियासत में उथल-पुथल के बीच संदीपन साहा और ऋतोब्रता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित कर दिया गया है। पार्टी की इस कार्रवाई के बाद संदीपन साहा ने संगठन की आंतरिक कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव में ऐसे लोगों के हस्ताक्षर शामिल किए गए, जो संबंधित बैठक में मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर उठाए सवाल
संदीपन साहा ने कहा कि इस विवाद में अभिषेक बनर्जी का नाम इसलिए सामने आ रहा है क्योंकि उन्होंने पार्टी के महासचिव के रूप में विधायकों की सूची पर हस्ताक्षर किए थे।
उनका आरोप है कि जिस सूची को मंजूरी दी गई, उसमें कई त्रुटियां थीं और सूची के सत्यापन की जिम्मेदारी भी अभिषेक बनर्जी की थी। साहा ने कहा कि यदि सूची में गलतियां हैं तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर विवाद
इस बीच, हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े प्रस्ताव को लेकर भी चर्चा हुई। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि संदीपन साहा और ऋतोब्रता बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि नेता प्रतिपक्ष के चुनाव से संबंधित प्रस्ताव में कई अनियमितताएं और प्रक्रियागत खामियां थीं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
राज्य की राजनीति पहले से ही तनावपूर्ण माहौल में है। हाल ही में अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले की घटना सामने आई थी। इसके अगले ही दिन कल्याण बनर्जी पर भी हमले की खबरों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।
इन घटनाओं के बाद पार्टी नेतृत्व, विशेषकर ममता बनर्जी की नाराजगी और संगठन के भीतर बढ़ती असहमति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दो विधायकों के निष्कासन और उनके आरोपों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है, जिसका असर आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है।
