Movie prime

UGC New Rules : क्या है यूजीसी का नया नियम, क्यों मचा है देशभर में हंगामा, किस रिपोर्ट के आधार पर बने ये नियम?

 
UGC
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

नई दिल्ली। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने वर्ष 2026 के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने को लेकर नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों का नाम “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” रखा गया है। जहां एक ओर सरकार और UGC इसे कैंपस में समानता और सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन नियमों को लेकर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विरोध भी तेज हो गया है।

क्या हैं UGC के नए नियम?

UGC के नए नियमों के तहत देश की हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी (Equity Committee) बनाना अनिवार्य होगा। यह कमेटी विशेष रूप से SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों से जुड़ी भेदभाव की शिकायतों को सुनेगी और तय समय सीमा में उनका निपटारा करेगी।

नियमों के अनुसार, इस कमेटी में SC-ST, OBC, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी जरूरी होगी। कमेटी का उद्देश्य कैंपस में बराबरी का माहौल बनाना और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना है।

क्यों लाने पड़े ये सख्त नियम?

UGC के ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लाए गए हैं। वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों की सुनवाई के दौरान UGC को 8 हफ्तों के भीतर नए और सख्त नियम बनाने के आदेश दिए थे।

रोहित वेमुला (हैदराबाद यूनिवर्सिटी) और पायल तड़वी (मुंबई मेडिकल कॉलेज) ने कथित जातिगत उत्पीड़न के बाद आत्महत्या कर ली थी। इन मामलों में उनकी माताओं द्वारा दाखिल जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 2012 के पुराने नियमों को अपर्याप्त बताया और उन्हें अपडेट करने को कहा था।

UGC की रिपोर्ट में क्या सामने आया?

UGC ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में बताया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार:

2017-18 में ऐसी शिकायतें 173 थीं

2023-24 में बढ़कर 378 हो गईं

यानी पांच साल में करीब 118.4% की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि 90 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा किया गया, लेकिन पेंडिंग केस भी बढ़े। 2019-20 में जहां 18 मामले लंबित थे, वहीं 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 108 हो गई।

नए नियमों में भेदभाव की परिभाषा

UGC ने नए नियमों में जातिगत भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह का प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष या अपमानजनक व्यवहार भेदभाव की श्रेणी में आएगा।

यदि किसी छात्र की गरिमा को ठेस पहुंचती है या शिक्षा में समान अवसर बाधित होता है, तो इसकी शिकायत इक्विटी कमेटी में की जा सकेगी। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है।

फिर विरोध क्यों हो रहा है?

इन नियमों के खिलाफ जनरल कैटेगरी (सवर्ण) के छात्रों और संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि नियमों में सिर्फ SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव को ही मान्यता दी गई है, जबकि जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव का शिकार मानने का कोई प्रावधान नहीं है।

विरोध करने वालों का आरोप है कि इन नियमों का दुरुपयोग कर झूठी शिकायतों के जरिए सवर्ण छात्रों और शिक्षकों को फंसाया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि ये नियम UGC एक्ट और उच्च शिक्षा में समान अवसर की भावना के खिलाफ हैं।

कुल मिलाकर क्या है पूरा विवाद?

UGC का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और बढ़ती शिकायतों के आंकड़ों के आधार पर ये नियम जरूरी थे। वहीं, जनरल कैटेगरी के छात्रों को डर है कि नियम एकतरफा हैं और उनके खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं।

एक तरफ दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों की सुरक्षा और समानता का सवाल है, तो दूसरी तरफ सवर्ण छात्रों की आशंका कि नियमों का गलत इस्तेमाल होगा। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और देशभर के विश्वविद्यालयों में इसे लेकर बहस और विरोध जारी है।