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UNGA में भारत का सख्त रुख, पहलगाम हमले के गुनहगारों से लेकर फंडिंग करने वालों तक पर कार्रवाई की मांग

UNGA की छठी समिति में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख दोहराया। सांसद बिप्लब कुमार देब ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए आतंकियों, साजिशकर्ताओं, फंडिंग करने वालों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराने की मांग की। भारत ने CCIT को जल्द पूरा करने और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया।
 
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नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की छठी समिति में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपना सख्त रुख दोहराया है। बीजेपी सांसद और भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य बिप्लब कुमार देब ने भारत की ओर से राष्ट्रीय वक्तव्य रखते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी भी आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए आतंकवादियों के साथ उनके साजिशकर्ताओं, फंडिंग करने वालों और प्रायोजकों को भी जवाबदेह ठहराने की मांग की।

‘अच्छे’ और ‘बुरे’ आतंकवाद में कोई फर्क नहीं

बिप्लब कुमार देब ने कहा कि आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले आतंकवादी हमलों का कोई औचित्य नहीं हो सकता। भारत ने साफ किया कि आतंकवाद को ‘अच्छा’ और ‘बुरा’ बताकर अलग-अलग श्रेणियों में नहीं बांटा जा सकता।

भारत ने आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि इससे विकास और मानवाधिकार भी प्रभावित होते हैं। देब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ठोस और समन्वित कार्रवाई की अपील की।

पहलगाम हमले का भी किया जिक्र

अपने संबोधन में बिप्लब देब ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के सीमा-पार आतंकवाद के लिए केवल हमलावर ही नहीं, बल्कि उन्हें संगठित करने वाले, आर्थिक मदद देने वाले और प्रायोजक भी जवाबदेह होने चाहिए।

भारत ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है, ताकि आतंकवादी नेटवर्क और उन्हें समर्थन देने वाले तंत्र के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

आतंकवाद में नई तकनीकों के इस्तेमाल पर चिंता

भारत ने आतंकवादी संगठनों द्वारा उभरती तकनीकों के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। देब ने कहा कि आतंकवादी संगठन नई तकनीकों का इस्तेमाल भर्ती, कट्टरपंथीकरण, प्रचार, ऑपरेशन की योजना बनाने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने में कर रहे हैं।

ऐसे में भारत ने आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी सहयोग, कानूनी व्यवस्था और सूचना साझा करने की क्षमता को मजबूत करने की जरूरत बताई।

CCIT को जल्द पूरा करने की मांग

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में Comprehensive Convention on International Terrorism (CCIT) को जल्द अंतिम रूप देने की अपनी पुरानी मांग भी दोहराई। भारत का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक कानूनी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारत ने 1996 में CCIT का प्रस्ताव रखा था और लंबे समय से इसके जल्द निष्कर्ष की वकालत करता रहा है। देब ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय नियमों को मजबूत करने के लिए इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जरूरी है।

आतंकवाद से निपटने के लिए भारत की छह प्राथमिकताएं

बिप्लब देब ने भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति की छह प्रमुख प्राथमिकताओं का भी उल्लेख किया। इनमें आतंकवादी फंडिंग पर रोक लगाना, उभरती तकनीकों के दुरुपयोग को रोकना और आतंकवाद के पीड़ितों को केंद्र में रखना शामिल है।

भारत की अन्य प्राथमिकताओं में राष्ट्रीय स्तर पर क्षमता निर्माण को मजबूत करना, आतंकवादी विचारधारा का मुकाबला करना और आतंकवादी ढांचे को कमजोर करना शामिल है।

सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार पर जोर

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यह भी दोहराया कि वह सीमा-पार आतंकवाद से अपने नागरिकों की रक्षा करने का अधिकार रखता है। देब ने आतंकवादी संगठनों, उनके वित्तीय नेटवर्क और उन्हें सुरक्षित ठिकाने या समर्थन देने वालों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई।

UNGA की छठी समिति में भारत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ मजबूत कानूनी व्यवस्था और आतंकवादी नेटवर्क को समर्थन देने वाले तंत्र पर कार्रवाई की मांग लगातार उठा रही है।