Union Budget 2026-27: स्वास्थ्य पर बड़ा फोकस, सस्ती और सुलभ इलाज की उम्मीद
New Delhi : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। इस बार बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सहित अधिकांश विकासशील देशों में स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च विकसित देशों की तुलना में काफी कम है, जबकि मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है।
विश्व बैंक की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अपनी GDP का लगभग 17-18 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करता है, जबकि जापान इसमें 10-11 प्रतिशत और रूस 5-6 प्रतिशत खर्च करता है। भारत में यह आंकड़ा केवल 3-4 प्रतिशत है। प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च की बात करें तो भारत में 100-200 डॉलर के बीच है, जबकि अमेरिका में यह 12,000 डॉलर, जापान में 4,150 डॉलर और रूस में 1,474 डॉलर है।
विशेषज्ञों की राय
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शरद अग्रवाल का कहना है कि बजट में स्वास्थ्य पर खर्च को स्पष्ट मदों में दिखाया जाना चाहिए, ताकि पता चल सके कि कितना इंफ्रास्ट्रक्चर और कितना प्रशासनिक खर्च में जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि दवाओं, मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल उत्पादों को GST से बाहर किया जाए और मेडिकल उपकरणों पर सीमा शुल्क में राहत दी जाए। इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस को जीवन बीमा जैसी टैक्स छूट दी जानी चाहिए।
विशेष रूप से दूर-दराज के इलाकों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है। इसमें एंबुलेंस सेवाएं, ऑक्सीजन प्लांट, ऑपरेशन थिएटर, वेंटिलेटर और अन्य उपकरण शामिल हैं। कोविड-19 के दौरान लगाए गए कई उपकरण अब खराब हैं, इसलिए बजट के तहत खर्च की निगरानी और गुणवत्ता की जांच अत्यंत आवश्यक होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाने से न केवल आम लोगों के लिए इलाज सस्ता और सुलभ होगा, बल्कि यह भारत की आर्थिक और सामाजिक मजबूती के लिए भी जरूरी है।
