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UPI पर नहीं लगेगा यूजर्स से चार्ज, फिर किससे वसूली जाएगी फीस? सरकार ने दिया बड़ा अपडेट

UPI Payment Charges को लेकर सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। आम यूजर्स के लिए UPI पेमेंट फ्री रहेगा, जबकि भविष्य में कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मामूली MDR लगाया जा सकता है। जानिए UPI चार्ज, Merchant Discount Rate और सरकार के नए प्रस्ताव का आम लोगों और कारोबारियों पर क्या असर होगा।

 
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UPI Payment Charges: UPI Payment को लेकर चल रही चार्ज की चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने शनिवार को स्थिति साफ कर दी है। सरकार के मुताबिक, आम यूजर्स को UPI से पेमेंट करने पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा। हालांकि, भविष्य में कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एक मामूली Merchant Discount Rate (MDR) लगाया जा सकता है। सरकार का कहना है कि यह शुल्क सभी UPI ट्रांजैक्शन पर लागू नहीं होगा।

आम लोगों के लिए UPI पेमेंट फ्री रहेगा

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि Person-to-Person (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जाने वाला UPI भुगतान पूरी तरह फ्री रहेगा। इसके अलावा अधिकांश मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर भी किसी तरह का शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

सरकार के अनुसार, अगर भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो यह केवल एक तय सीमा से ऊपर होने वाले कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही लागू होगा। यानी हर UPI पेमेंट पर कोई नया चार्ज लगाने की योजना नहीं है।

MDR क्या है और किसे देना पड़ सकता है?

Merchant Discount Rate यानी MDR वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने से जुड़ी सेवाओं के लिए मर्चेंट साइड पर लगाया जा सकता है। सरकार ने कहा है कि प्रस्तावित शुल्क मामूली होगा और डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लागू MDR की तुलना में काफी कम रहेगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने इसे threshold-based रखने की बात कही है। यानी एक निश्चित सीमा से ऊपर होने वाले सीमित प्रकार के कारोबारी लेनदेन ही इसके दायरे में आ सकते हैं।

UPI पर चार्ज लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?

दरअसल, लोकसभा ने एक दिन पहले Payment and Settlement Systems Act, 2007 में संशोधन से जुड़ा विधेयक पारित किया था। इस संशोधन के जरिए सरकार को UPI और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यमों पर बैंकों और सेवा प्रदाताओं को शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार मिल सकता है।

सरकार का कहना है कि यह प्रावधान सीधे तौर पर हर UPI भुगतान पर शुल्क लगाने के लिए नहीं है, बल्कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने के लिए एक सक्षम ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से है।

UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बढ़ रही लागत

सरकार ने बताया कि UPI के लेनदेन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने के उपायों, तकनीकी ढांचे और सिस्टम अपग्रेड पर लगातार निवेश की जरूरत पड़ रही है।

सरकार के मुताबिक, केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहकर UPI के अगले चरण का विस्तार करना लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होगा। इसलिए डिजिटल पेमेंट सिस्टम के लिए ऐसा मॉडल तैयार करने की जरूरत है, जिससे इसमें निवेश और प्रतिस्पर्धा दोनों को बढ़ावा मिले।

कांग्रेस ने सरकार की सफाई पर उठाए सवाल

सरकार के इस स्पष्टीकरण के बीच कांग्रेस ने संभावित MDR को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भले ही MDR सीधे मर्चेंट से लिया जाए, लेकिन कारोबारी भविष्य में इस लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर बढ़ी कीमतों या अलग-अलग प्राइसिंग के जरिए डाल सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि मर्चेंट में छोटे कारोबारी, किराना दुकानदार और स्ट्रीट वेंडर भी शामिल हैं, जिनके लिए UPI बेहद महत्वपूर्ण भुगतान माध्यम बन चुका है।

सरकार ने बाहरी दबाव की खबरों को बताया गलत

वित्त मंत्रालय ने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें UPI से जुड़े बदलावों को किसी बाहरी दबाव से जोड़कर देखा जा रहा था। सरकार ने ऐसी खबरों को गलत और भ्रामक बताया।

सरकार ने दोहराया कि UPI भारत का अपना डिजिटल पेमेंट सिस्टम है और नागरिकों के लिए इसे फ्री बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। साथ ही, सरकार ने UPI को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत और टिकाऊ बनाने पर भी जोर दिया है।

तो आम UPI यूजर को क्या करना होगा?

फिलहाल आम यूजर के लिए राहत की बात यही है कि UPI से पैसे भेजने या भुगतान करने पर कोई नया चार्ज नहीं लगाया गया है। संभावित MDR भी सभी लेनदेन पर नहीं होगा और सरकार के मुताबिक इसका दायरा सीमित तथा तय सीमा से ऊपर वाले कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन तक रह सकता है।

इसलिए UPI इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए अभी UPI Payment Free ही रहेगा, जबकि सरकार का नया प्रावधान डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।