Movie prime

J&K को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पर सदन में घमासान, BJP ने लगाए नारे और किया वॉकआउट

 
..
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर सोमवार, 28 सितंबर को विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी मिली। बीजेपी विधायकों ने इसका विरोध किया और सदन से वॉकआउट कर दिया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

BJP विधायकों ने किया जोरदार विरोध

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी विधायकों ने सरकार के रुख का विरोध किया। बीजेपी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर से कुर्सी छोड़ने की मांग करते हुए सदन के वेल में पहुंचकर नारेबाजी की।

इस दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘स्पीकर साहब, कुर्सी छोड़ो’ जैसे नारे लगाए गए। इसके बाद बीजेपी विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष के विरोध के बावजूद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

क्या है विधानसभा के प्रस्ताव में?

प्रस्ताव में केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल और आवश्यक रूप से बहाल करने का आह्वान किया गया है। विधानसभा ने यह भी संकल्प लिया कि पारित प्रस्ताव को भारत सरकार के पास भेजा जाएगा।

प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर विधानसभा की ओर से पहले पारित 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 के प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया है।

हालांकि, 10 विधायकों की ओर से पेश किए गए संशोधन प्रस्तावों में पूर्ण राज्य के साथ विशेष राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी शामिल थी। सदन में मतदान के दौरान विशेष दर्जे की मांग को शामिल नहीं किया गया और केवल पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने से जुड़ा प्रस्ताव पारित हुआ।

2019 में बदली थी जम्मू-कश्मीर की स्थिति

अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक और प्रशासनिक स्थिति में बड़ा बदलाव किया था। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के तहत मिले विशेष प्रावधानों को खत्म करने का फैसला लिया गया था।

इसके बाद 31 अक्टूबर 2019 से जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा समाप्त हो गया था।

2024 के चुनाव के बाद बनी उमर अब्दुल्ला सरकार

जम्मू-कश्मीर में 2024 में विधानसभा चुनाव हुए। चुनाव के बाद उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकार बनी। नई सरकार बनने के बाद से ही केंद्र से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार उठती रही है।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 25 सितंबर को विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने से जुड़ा प्रस्ताव पेश किया था। इस पर सदन में विधायकों की राय मांगी गई थी।

Statehood पर सहमति, लेकिन BJP ने उठाए सवाल

बीजेपी ने पूर्ण राज्य के दर्जे के मुद्दे पर चर्चा का विरोध नहीं किया, लेकिन प्रस्ताव में 5 अगस्त 2019 से पहले की जम्मू-कश्मीर की स्थिति और अनुच्छेद 370 से जुड़े संदर्भों को लेकर आपत्ति जताई।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि बीजेपी राज्य के दर्जे की बहाली के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन अलग संविधान और अलग झंडे की बात स्वीकार नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि भारत के सभी राज्यों में भारतीय संविधान लागू है और जम्मू-कश्मीर भी इससे अलग नहीं हो सकता। सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि उमर अब्दुल्ला सरकार जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, वह देश के संवैधानिक ढांचे के खिलाफ है।

अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में

विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद अब इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। हालांकि, विधानसभा का यह प्रस्ताव अपने आप जम्मू-कश्मीर का दर्जा नहीं बदलता। पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का अंतिम फैसला केंद्र सरकार के स्तर पर होना है।