ड्रग्स, तानाशाही या तेल की लड़ाई? मादुरो को हटाने की अमेरिकी चाल या अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक राजनीति में तनाव बढ़ गया है। रूस, चीन और ब्राजील ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है, जबकि भारत ने अपने नागरिकों को वेनेजुएला यात्रा से बचने की सलाह जारी की है।
US Venezuela Conflict: वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो लंबे समय से अमेरिका के निशाने पर रहे हैं। ड्रग्स तस्करी, अवैध प्रवासन और तानाशाही शासन जैसे आरोपों को आधार बनाकर अमेरिका लगातार वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलकर कहा था कि अगर मादुरो सत्ता छोड़ दें तो यह “स्मार्ट फैसला” होगा। हालांकि, अमेरिका अपने गंभीर आरोपों के समर्थन में आज तक ठोस और सर्वमान्य साक्ष्य पेश नहीं कर सका है।
आरोपों की लंबी लिस्ट, सबूतों की कमी
अमेरिका का दावा है कि 2013 के बाद आर्थिक संकट और दमनकारी नीतियों के चलते करीब 80 लाख वेनेजुएलाई नागरिक पलायन कर चुके हैं। ट्रंप प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि वेनेजुएला के रास्ते अमेरिका में फेंटेनिल और कोकीन जैसी नशीली दवाओं की तस्करी बढ़ी है। इसी आधार पर ‘ट्रेन डी आरागुआ’ और ‘कार्टेल डी लास सोल्स’ को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया।
मादुरो ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका “ड्रग्स के खिलाफ जंग” की आड़ में उन्हें सत्ता से हटाकर वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर कब्जा करना चाहता है। कई विश्लेषकों का मानना है कि ‘कार्टेल डी लास सोल्स’ कोई संगठित गिरोह नहीं, बल्कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के लिए प्रयुक्त शब्द मात्र है।
बस ड्राइवर से राष्ट्रपति तक का सफर
निकोलस मादुरो का राजनीतिक सफर असाधारण रहा है। 23 नवंबर 1962 को जन्मे मादुरो एक श्रमिक नेता के बेटे हैं और राजनीति में आने से पहले बस ड्राइवर थे। केवल हाई स्कूल तक शिक्षा प्राप्त मादुरो ने क्यूबा जाकर वैचारिक प्रशिक्षण लिया। 1992 में ह्यूगो शावेज के नेतृत्व में विफल तख्तापलट के बाद वे शावेज के करीबी बन गए। शावेज सरकार में उन्होंने विदेश मंत्री और नेशनल असेंबली अध्यक्ष जैसे अहम पद संभाले। 2013 में शावेज के निधन के बाद मादुरो राष्ट्रपति बने।
हालांकि, उनके शासनकाल में वेनेजुएला गंभीर आर्थिक संकट, रिकॉर्ड महंगाई, खाद्य संकट और मानवाधिकार उल्लंघनों से जूझता रहा। 2014 और 2017 के जन आंदोलनों को सख्ती से दबाया गया। जनवरी 2025 के चुनाव में तीसरी बार जीत के बावजूद विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चुनावों को विवादित बताया।
अमेरिकी कार्रवाई पर वैश्विक प्रतिक्रिया
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
• रूस ने इसे वैचारिक शत्रुता का नतीजा बताते हुए मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की।
• स्पेन ने संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान की पेशकश की।
• ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और खतरनाक मिसाल करार दिया।
• चीन ने अमेरिकी कार्रवाई को वेनेजुएला की संप्रभुता पर गंभीर हमला बताया।
भारत की एडवाइजरी
भारत ने हालिया घटनाक्रम को देखते हुए वेनेजुएला की यात्रा से बचने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने वहां मौजूद भारतीय नागरिकों से अत्यधिक सतर्कता बरतने और गतिविधियां सीमित रखने का अनुरोध किया है।
वेनेजुएला संकट केवल एक देश बनाम अमेरिका का मामला नहीं, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और शक्ति संतुलन की परीक्षा है। अमेरिका की एकतरफा कार्रवाई जहां वैश्विक अस्थिरता को बढ़ा सकती है, वहीं संवाद और कूटनीति ही इस संकट का स्थायी समाधान प्रतीत होते हैं। सवाल यह है कि क्या विश्व समुदाय टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता चुन पाएगा, या यह संघर्ष एक नई भू-राजनीतिक दरार को जन्म देगा।
