तकनीक और दिमाग तक पहुंच चुका है युद्ध, सेना को अपनानी होगी ‘इंटेलिजेंट वॉरफेयर’ की रणनीति: सीडीएस जनरल अनिल चौहान
नई दिल्ली। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान ने कहा है कि आधुनिक दौर का युद्ध अब सिर्फ जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं रहा है। आज की लड़ाई इंटरनेट, तकनीक, साइबर स्पेस और लोगों की सोच तक पहुंच चुकी है। ऐसे में भारतीय सशस्त्र सेनाओं को पारंपरिक “नेट-सेंट्रिक ऑपरेशन” से आगे बढ़कर “इंटेलिजेंट वॉरफेयर” यानी स्मार्ट और तकनीक-आधारित युद्ध प्रणाली की ओर बढ़ना होगा।
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने यह बातें हैदराबाद स्थित College of Defence Management में आयोजित एक वार्षिक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब लड़ाई सिर्फ मैदान में आमने-सामने की टक्कर तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, साइबर क्षमताओं और सूचना तंत्र के माध्यम से भी लड़ी जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्ध में पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ नई तकनीकों और बिना सीधे टकराव वाले तरीकों का महत्व बढ़ गया है। इसलिए सेना को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।
सीडीएस ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को ऐसी मजबूत रणनीतिक क्षमता विकसित करनी चाहिए, जो परमाणु हथियारों के उपयोग के बिना भी दुश्मन को प्रभावी ढंग से रोक सके। उनका कहना था कि ऐसी क्षमता देश को किसी भी तनाव या टकराव की स्थिति में हर स्तर पर मजबूती से जवाब देने और जीत हासिल करने में सक्षम बनाएगी।
जनरल चौहान ने कहा कि सेना को अब अलग-अलग क्षेत्रों—जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष—में अलग-अलग काम करने की बजाय सभी क्षेत्रों में एक साथ और समन्वित तरीके से काम करना होगा। इसे “ऑल रियल्म, ऑल डोमेन ऑपरेशन” की रणनीति कहा जाता है, जो भविष्य के युद्ध की जरूरत है।
