सम्राट जी को बड़ा आदमी बनाएंगे...अमित शाह ने निभाया 6 महीने पहले किया वादा, बिहार में शुरू हुआ नया अध्याय
पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सम्राट चौधरी ने बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की कमान संभाल ली। उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही प्रदेश में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। खास बात यह है कि वे बिहार के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने हैं जो भारतीय जनता पार्टी से आते हैं।
सम्राट चौधरी की ताजपोशी भले ही आज हुई हो, लेकिन इसकी नींव करीब छह महीने पहले ही रख दी गई थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तारापुर की एक चुनावी रैली में कहा था कि “सम्राट जी को जिताइए, मोदी जी उन्हें बड़ा आदमी बनाएंगे।” अब यह बयान हकीकत में बदल गया है।
राजनीतिक सफर: RJD से BJP तक
सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की। बाद में वे जनता दल यूनाइटेड से होते हुए बीजेपी में शामिल हुए।
साल 1999 में वे बिहार सरकार में कृषि मंत्री बने। इसके बाद 2000 और 2010 में विधायक चुने गए। 2018 के बाद बीजेपी में उनकी पहचान तेजी से मजबूत हुई और वे संगठन में अहम भूमिका निभाने लगे।
परिवार और राजनीतिक विरासत
सम्राट चौधरी का राजनीति से पुराना नाता रहा है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं और कई बार विधायक व सांसद भी रहे। उनकी मां पार्वती देवी भी विधायक रह चुकी हैं। ऐसे में उन्हें राजनीति विरासत में मिली।
डिप्टी सीएम से सीएम तक का सफर
2023 में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद सम्राट चौधरी का कद और बढ़ा। जब नीतीश कुमार ने एनडीए में वापसी की, तब उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद 2025 में भी उन्होंने डिप्टी सीएम का पद संभाला।
अब विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद वे बिहार के मुख्यमंत्री बन गए हैं, जो उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा पड़ाव माना जा रहा है।
क्या बदलेगा बिहार की राजनीति में?
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में नई रणनीतियों, नए फैसलों और नए समीकरणों की उम्मीद की जा रही है। आने वाले समय में उनके नेतृत्व में राज्य की दिशा और दशा किस तरह बदलती है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
