क्या है Claude Mythos, जिससे डर रहे हैं बैंक और सरकार? टेक्नोलॉजी से बढ़ी टेंशन
New Delhi : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की। इस दौरान उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल Claude Mythos से जुड़े संभावित साइबर सुरक्षा खतरों पर चर्चा की गई।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, बैठक में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को इस AI मॉडल के संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क रहने को कहा गया। मंत्रालय ने कहा कि Claude Mythos जैसे उन्नत टूल से निपटने के लिए बेहतर समन्वय, सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया जरूरी है।
क्या है Claude Mythos?
Claude Mythos, अमेरिकी कंपनी Anthropic द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक AI मॉडल है। इसे साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बेहद उन्नत माना जा रहा है। कंपनी के अनुसार, यह सिस्टम पुराने सॉफ्टवेयर और नेटवर्क में छिपी छोटी-छोटी कमजोरियों को भी खोजने में सक्षम है, जिन्हें सामान्य तौर पर पकड़ना मुश्किल होता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तकनीक तक सीमित पहुंच दी गई है और केवल चुनिंदा कंपनियां जैसे Amazon, Microsoft और Google ही इसका इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि, कुछ अनधिकृत यूजर्स द्वारा इसकी पहुंच हासिल करने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है।
क्या हैं खतरे?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इस AI का गलत इस्तेमाल हुआ तो यह बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर डेटा चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर हमलों को अंजाम दे सकता है। वित्त मंत्री ने भी चेताया कि इस तकनीक का दुरुपयोग ग्राहकों की निजी जानकारी और बैंकिंग सिस्टम के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
भारत के अलावा United States भी इस तकनीक पर नजर बनाए हुए है। रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस और अमेरिकी एजेंसियां भी साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इस तरह के AI टूल्स के उपयोग और जोखिमों पर काम कर रही हैं।
क्या करें बैंक?
सरकार ने बैंकों को सलाह दी है कि वे अपने साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साझा करें, ताकि संभावित हमलों को समय रहते रोका जा सके।
यह मामला दिखाता है कि तेजी से विकसित हो रही AI तकनीक जहां एक ओर सुरक्षा को मजबूत कर सकती है, वहीं इसके दुरुपयोग से बड़े खतरे भी पैदा हो सकते हैं।
