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भारत में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार क्या है? जानिए संविधान क्या कहता है और कब जरूरी होती है पुलिस की अनुमति
 

 
 भारत में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार क्या है? जानिए संविधान क्या कहता है और कब जरूरी होती है पुलिस की अनुमति
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नई दिल्ली: देश में किसी भी सरकारी नीति, फैसले या कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक अहम हिस्सा माना जाता है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान हुए विवाद और पुलिस कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि भारत में प्रदर्शन करने का कानूनी अधिकार क्या है और इसके लिए किन नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

संविधान देता है विरोध-प्रदर्शन का अधिकार

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत हर नागरिक को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 19(1)(b) बिना हथियार के शांतिपूर्ण ढंग से सार्वजनिक स्थान पर एकत्र होने का अधिकार सुनिश्चित करता है।

सुप्रीम कोर्ट भी कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र का अभिन्न अंग है। हालांकि, यह अधिकार पूर्णतः असीमित नहीं है। सार्वजनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और अन्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार उचित और कानूनी प्रतिबंध लगा सकती है।

प्रदर्शन के लिए क्यों जरूरी होती है पुलिस की अनुमति?

भारत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। इसलिए किसी भी सार्वजनिक स्थान पर रैली, धरना, जुलूस या सभा आयोजित करने के लिए संबंधित पुलिस प्रशासन से अनुमति लेना आवश्यक होता है।

यदि कार्यक्रम किसी एक थाना क्षेत्र में है तो संबंधित पुलिस स्टेशन या डीसीपी कार्यालय से अनुमति ली जाती है। वहीं, यदि जुलूस या प्रदर्शन कई थाना क्षेत्रों से गुजरता है, तो कमिश्नरेट स्तर पर मंजूरी की आवश्यकता पड़ सकती है। पुलिस ट्रैफिक, सुरक्षा व्यवस्था और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अनुमति जारी करती है।

अनुमति के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?

पुलिस से अनुमति लेने के लिए आयोजकों को एक औपचारिक आवेदन देना होता है। आवेदन में आयोजक का नाम, पता और मोबाइल नंबर के साथ प्रदर्शन का उद्देश्य, तिथि, समय, संभावित भीड़, लाउडस्पीकर के उपयोग और टेंट-पंडाल जैसी व्यवस्थाओं का विवरण देना पड़ता है।

यदि रैली या मार्च निकाला जाना है तो उसका पूरा रूट पहले से पुलिस को बताना होता है। आवेदन के साथ पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र और पासपोर्ट आकार की फोटो भी जमा करनी होती है। कई मामलों में पुलिस भीड़ नियंत्रण, पेयजल, शौचालय और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर हलफनामा भी मांग सकती है।

किन परिस्थितियों में पुलिस अनुमति देने से इनकार कर सकती है?

यदि पुलिस को आशंका हो कि किसी प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है, हिंसा भड़क सकती है, सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है या यातायात और आम जनजीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है, तो उसे अनुमति देने से इनकार करने का कानूनी अधिकार है।

ऐसी स्थिति में प्रशासन सार्वजनिक हित और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रदर्शन की अनुमति रद्द या अस्वीकार कर सकता है।