धर्मेंद्र प्रधान कौन हैं? जानिए शिक्षा मंत्री से इस्तीफे तक का सफर, कितनी है संपत्ति और कितने दर्ज हैं केस
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब नीट पेपर लीक 2026 को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक माहौल गरमा दिया था। लगातार बढ़ते विरोध के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी।
अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि वे पिछले चार दशकों से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें देश सेवा का अवसर मिला, जिसके लिए वे सदैव ऋणी रहेंगे।
इस्तीफे के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान कौन हैं, उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है, उनके पास कितनी संपत्ति है और उनके खिलाफ कितने मामले दर्ज हैं।
ओडिशा के राजनीतिक परिवार से हैं धर्मेंद्र प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के अनुगुल जिले में हुआ था। वे एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता देबेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े धर्मेंद्र प्रधान को बचपन से ही सामाजिक और राजनीतिक विषयों की समझ विकसित करने का अवसर मिला।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी स्कूली शिक्षा तालचर के हंडिधुआ हाई स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर से मानवशास्त्र (Anthropology) में एमए की डिग्री हासिल की।
छात्र जीवन के दौरान वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े। वर्ष 1983 में संगठन के सक्रिय सदस्य बने और 1985 में तालचर कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए। बाद में वे उत्कल विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति का प्रमुख चेहरा बने और एबीवीपी में राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय सचिव तक की जिम्मेदारियां निभाईं।
विधायक से सांसद तक का राजनीतिक सफर
धर्मेंद्र प्रधान ने वर्ष 2000 में मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा और ओडिशा के पल्लाहड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद वर्ष 2004 में वे देवगढ़ लोकसभा सीट से सांसद बने।
बाद के वर्षों में उन्होंने बिहार और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद में प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने ओडिशा की संबलपुर सीट से जीत दर्ज कर दोबारा लोकसभा पहुंचे।
बीजेपी संगठन में भी उन्हें एक मजबूत रणनीतिकार माना जाता है। वे 2004 से 2006 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और कई राज्यों में पार्टी के चुनाव प्रभारी की भूमिका निभाई।
मोदी सरकार में संभाली कई अहम जिम्मेदारियां
वर्ष 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) सौंपा गया।
उज्ज्वला योजना बनी बड़ी उपलब्धि
पेट्रोलियम मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना मानी जाती है, जिसके तहत करोड़ों गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए गए।
कौशल विकास और शिक्षा मंत्रालय
वर्ष 2017 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दी गई। इसके बाद 2021 में मोदी मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के दौरान उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।
कभी खुद भी पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर चुके हैं
दिलचस्प बात यह है कि धर्मेंद्र प्रधान स्वयं भी एक समय पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 1997 में ओडिशा में हुए एक पेपर लीक मामले के विरोध में एबीवीपी द्वारा राज्य सचिवालय के सामने आयोजित प्रदर्शन में वे शामिल हुए थे। इस दौरान पुलिस लाठीचार्ज में वे घायल भी हुए थे।
कितनी है धर्मेंद्र प्रधान की संपत्ति?
2024 के लोकसभा चुनाव में दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे के अनुसार—
धर्मेंद्र प्रधान की कुल नेट वर्थ लगभग 1.99 करोड़ रुपये है।
उनके पास 1.39 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है।
92 लाख रुपये की अचल संपत्ति है।
वहीं उनकी पत्नी मृदुला ठाकुर प्रधान के पास—
2.95 करोड़ रुपये की चल संपत्ति,
1.37 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति,
लगभग 20 लाख रुपये की देनदारी है।
इस प्रकार उनकी पत्नी की कुल नेट वर्थ लगभग 4.12 करोड़ रुपये है। दोनों की संयुक्त पारिवारिक संपत्ति करीब 6.38 करोड़ रुपये बताई गई है।
जमीन, मकान और वाहन
हलफनामे के अनुसार—
ओडिशा में लगभग 12 लाख रुपये मूल्य की कृषि भूमि।
करीब 20.50 लाख रुपये मूल्य की गैर-कृषि भूमि।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम और भुवनेश्वर में लगभग 1.98 करोड़ रुपये मूल्य के आवासीय फ्लैट/मकान।
धर्मेंद्र प्रधान के नाम 2011 मॉडल की होंडा सिटी कार।
पत्नी के नाम पर व्यावसायिक वाहन।
धर्मेंद्र प्रधान के पास करीब 200 ग्राम सोना (लगभग 13.5 लाख रुपये) और 2.5 किलो चांदी।
उनकी पत्नी के पास लगभग 35 लाख रुपये मूल्य का सोना और 10 किलो चांदी।
धर्मेंद्र प्रधान पर कितने मामले दर्ज हैं?
चुनावी हलफनामे के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं—
2005 – गारपोश रेलवे स्टेशन पर तपस्विनी एक्सप्रेस के ठहराव को हटाने के विरोध में रेल रोको आंदोलन से जुड़ा मामला। इसमें अभी आरोप तय नहीं हुए हैं।
2006 – पुरी में एक विवाह समारोह के दौरान पुलिस से कथित बहस का मामला। इसमें वर्ष 2015 में आरोप तय किए गए थे।
2010 – कंकाड़ाहाड़ा में एक किसान के परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा मामला।
इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। नीट पेपर लीक विवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर रहा है। ऐसे में उनका इस्तीफा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपती है और शिक्षा सुधारों की दिशा में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
