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50 लाख का खूंखार नक्सली ढेर, कौन था मादवी हिडमा? क्यों था सुरक्षा एजेंसियों का नंबर-1 टारगेट

Who is Madvi Hidma: छत्तीसगढ़ में कुख्यात माओवादी नेता मादवी हिडमा को 18 नवंबर 2025 को सुरक्षाबलों ने मार गिराया। वह PLGA की बटालियन-1 का प्रमुख था और उसके सिर पर भारी इनाम था। हिडमा ने कई बड़े हमले किए थे। उसकी मां ने एक हफ्ता पहले ही उसके आत्मसमर्पण की गुहार लगाई थी।

 
Who is Madvi Hidma
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Who is Madvi Hidma: छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की सीमा पर फैले घने जंगलों में 18 नवंबर 2025 को सुरक्षाबलों ने देश के सबसे कुख्यात और खूंखार नक्सलियों में से एक मादवी हिडमा को मार गिराया। 50 लाख रुपये के इनामी मादवी हिडमा की मौत के साथ बस्तर क्षेत्र में नक्सली आतंक का एक खौफनाक अध्याय समाप्त हो गया। ऑपरेशन के दौरान उसकी दूसरी पत्नी राजे उर्फ राजक्का भी मारी गई।

यह वही हिडमा था, जिसे एक सप्ताह पहले उसकी बूढ़ी मां ने भावुक होकर घर लौट आने और हिंसा छोड़ने की अपील की थी। लेकिन हिडमा ने मां की बात नहीं मानी—और ठीक सात दिन बाद सुरक्षा बलों ने उसे ढेर कर दिया।

देश का सबसे खतरनाक नक्सली, हिडमा को पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर-1 का प्रमुख माना जाता था। पिछले एक दशक में उसने माओवादी इतिहास के सबसे खतरनाक हमलों की योजना बनाई, जिनमें शामिल हैं-
•    ताड़मेटला हमला (2010)
•    झीरम घाटी हमला (2013)
•    बुर्कापाल घात (2017)
•    अरनपुर IED विस्फोट (2023)

इन हमलों में दर्जनों जवान और आम नागरिक शहीद हुए, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था हिल गई थी। केंद्र और राज्य सरकारें लंबे समय से उसकी तलाश में थीं और उसके सिर पर कुल एक करोड़ से ज्यादा का इनाम घोषित किया गया था।

50 की उम्र में बना सबसे बड़ा आतंकी चेहरा

रिपोर्ट के अनुसार हिडमा का जन्म सुकमा के पुवर्ती गांव में हुआ था। उसका असली नाम संतोष था। 14 की उम्र में वह ‘बाल संघम’ से जुड़ा और 17 साल की उम्र में नक्सलवाद की मुख्यधारा में शामिल हो गया। बेहद गुप्त रूप से काम करने वाला यह नक्सली ऐसा माना जाता था कि उससे मिलने के लिए भी माओवादी कार्यकर्ताओं को कई स्तर की मंजूरी लेनी पड़ती थी।

साल 2019 में उसे प्रमोशन देकर CPI (माओवादी) की सेंट्रल ऑर्गनाइजेशन कमेटी (COC) में शामिल किया गया, जहां देश के सबसे कट्टर व खूंखार नक्सली नेता फैसला लेते हैं। बस्तर से इस कमेटी में शामिल होने वाला वह एकमात्र आदिवासी था।

5-लेयर सुरक्षा में रहता था हिडमा

सूत्र बताते हैं कि हिडमा बेहद चालाक और रणनीतिक था, जो कभी भी किसी सभा या जनसंपर्क में सामने नहीं आता था। वह जंगलों में ऐसी लोकेशन बदलने की तकनीक में माहिर था कि सुरक्षा एजेंसियों को सालों तक उसकी सही लोकेशन का पता नहीं चल पाया।

उसकी पत्नी राजे उर्फ राजक्का, जो डिवीजनल कमेटी मेंबर थी, बटालियन में टीचर की भूमिका भी निभाती थी। दोनों साथ मिलकर कई बड़े हमलों की रणनीति तैयार करते थे।

मां ने की थी अंतिम गुहार- बेटा, वापस आ जाओ

हिडमा के मारे जाने से ठीक एक सप्ताह पहले छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा मोटरसाइकिल से उसके गांव पुवर्ती पहुंचे। यह बस्तर के इतिहास में पहली बार हुआ जब कोई बड़ा नेता हथियारों के बजाय बातचीत और सुलह का संदेश लेकर सबसे खतरनाक नक्सली के घर गया।

जब हिडमा की मां से मुलाकात हुई, तो वह रोते हुए बोलीं- ‘तुम कहां हो बेटा? वापस आ जाओ… हम घर पर कमाएंगे और खाएंगे… हिंसा छोड़ दो…’ सरकार ने भी उसे आत्मसमर्पण करने का मौका दिया, लेकिन हिडमा ने हथियार नहीं छोड़े।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को हिडमा को 30 नवंबर 2025 तक ढेर करने की सख्त डेडलाइन दी थी। इसी निर्देश के बाद सुरक्षा बलों ने आंध्र प्रदेश की सीमा के पास एक बड़े ऑपरेशन की योजना बनाई और 18 नवंबर को मुठभेड़ में हिडमा को मार गिराया। इस ऑपरेशन के साथ ही दशकों से बस्तर में आतंक फैलाने वाले सबसे खूंखार नक्सली का अंत हो गया।