कौन हैं DUSU के नए उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन? NSUI से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय उतरे, नंगे पैर किया प्रचार
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के नतीजों में इस बार निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत ने खासा ध्यान खींचा है। 18 सितंबर को हुए मतदान के बाद 19 सितंबर को हुई मतगणना में शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें कुल 30,634 वोट मिले।
दीपांशु शौकीन ने किसी बड़े छात्र संगठन के बैनर के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। खास बात यह है कि वह पहले एनएसयूआई से जुड़े हुए थे और उपाध्यक्ष पद के लिए संगठन से टिकट की उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने नामांकन भी दाखिल किया था। हालांकि, बाद में उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में बने रहे।
नंगे पैर किया चुनाव प्रचार
चुनाव प्रचार के दौरान दीपांशु शौकीन का अंदाज भी चर्चा में रहा। उन्होंने पूरे प्रचार अभियान के दौरान नंगे पैर घूमकर छात्रों से संपर्क किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सत्य निकेतन में हुए पीजी हादसे के बाद उन्होंने छात्रों के मुद्दों को लेकर संकल्प लिया था कि न्याय मिलने तक वह जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे। इसी संकल्प के तहत वह चुनाव प्रचार के दौरान भी नंगे पैर नजर आए।
पीरागढ़ी गांव के रहने वाले हैं शौकीन
दीपांशु शौकीन दिल्ली के पीरागढ़ी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है और फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय में बुद्धिस्ट स्टडीज की पढ़ाई कर रहे हैं। उनके पिता बस कंडक्टर हैं, जबकि उनकी मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं।
डूसू की चार सीटों में तीन एबीवीपी के खाते में
डूसू के चार प्रमुख पदों में से तीन पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की।
इस तरह डूसू के केंद्रीय पैनल की चार सीटों में तीन एबीवीपी और एक निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गईं। नतीजे सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया। दीपांशु शौकीन की जीत इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि उन्होंने बड़े छात्र संगठनों के उम्मीदवारों के बीच निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हुए उपाध्यक्ष पद अपने नाम किया।
