PM मोदी ने क्यों कही वर्क फ्रॉम होम करने की बात, क्या होने वाला है कोई बड़ा फैसला?
May 11, 2026, 11:10 IST
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प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल सोच-समझकर करने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए ऊर्जा बचत अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की आर्थिक मजबूती से भी जुड़ चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना काल के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां कंपनियों और संस्थानों को दोबारा घर से काम करने या हाइब्रिड मॉडल अपनाने पर विचार करना चाहिए।
बढ़ती ऊर्जा कीमतों के बीच सरकार की चिंता
वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय संकटों के कारण भारत पर भी दबाव बढ़ रहा है। सरकार चाहती है कि देश में ईंधन की खपत कम हो, ताकि विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव घटाया जा सके।
प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि फ्यूल बचत अब राष्ट्रीय आर्थिक हित से जुड़ा विषय बन चुका है।
कोरोना काल में दिखा था वर्क फ्रॉम होम का असर
कोरोना महामारी के दौरान देश में पहली बार बड़े स्तर पर वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाया गया था। आईटी, मीडिया, बैंकिंग और कंसल्टिंग सेक्टर की कई कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी थी।
उस समय सड़कों पर ट्रैफिक कम हुआ था, पेट्रोल-डीजल की खपत घटी थी और प्रदूषण स्तर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। अब सरकार सीमित स्तर पर फिर से इसी मॉडल को बढ़ावा देने की बात कर रही है।
वर्क फ्रॉम होम से क्या होंगे फायदे?
वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल का सबसे बड़ा फायदा ईंधन बचत माना जा रहा है। रोज ऑफिस आने-जाने में कम पेट्रोल और डीजल खर्च होगा, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों में कमी आ सकती है।
इसके अलावा कर्मचारियों का सफर में लगने वाला समय बचेगा, जिसे वे परिवार या दूसरे जरूरी कामों में इस्तेमाल कर सकेंगे। कंपनियों को भी ऑफिस स्पेस, बिजली और अन्य सुविधाओं पर कम खर्च करना पड़ेगा।
हर सेक्टर में संभव नहीं है WFH
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हर क्षेत्र में वर्क फ्रॉम होम लागू नहीं किया जा सकता। मैन्युफैक्चरिंग, परिवहन, अस्पताल, रिटेल और अन्य फिजिकल सर्विस सेक्टर में कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी होती है।
लेकिन भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़ी संख्या में ऐसी नौकरियां हैं, जिन्हें आसानी से हाइब्रिड या रिमोट मॉडल में चलाया जा सकता है।
‘ग्रीन वर्क पॉलिसी’ से घट सकता है तेल आयात
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार कंपनियों को प्रोत्साहन दे और राज्यों के साथ मिलकर ग्रीन वर्क पॉलिसी जैसी योजनाएं शुरू करे, तो भारत अपने तेल आयात खर्च में बड़ी कमी ला सकता है। इससे न केवल आर्थिक दबाव कम होगा, बल्कि भारतीय रुपये की स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना काल के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां कंपनियों और संस्थानों को दोबारा घर से काम करने या हाइब्रिड मॉडल अपनाने पर विचार करना चाहिए।
बढ़ती ऊर्जा कीमतों के बीच सरकार की चिंता
वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय संकटों के कारण भारत पर भी दबाव बढ़ रहा है। सरकार चाहती है कि देश में ईंधन की खपत कम हो, ताकि विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव घटाया जा सके।
प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि फ्यूल बचत अब राष्ट्रीय आर्थिक हित से जुड़ा विषय बन चुका है।
कोरोना काल में दिखा था वर्क फ्रॉम होम का असर
कोरोना महामारी के दौरान देश में पहली बार बड़े स्तर पर वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाया गया था। आईटी, मीडिया, बैंकिंग और कंसल्टिंग सेक्टर की कई कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी थी।
उस समय सड़कों पर ट्रैफिक कम हुआ था, पेट्रोल-डीजल की खपत घटी थी और प्रदूषण स्तर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। अब सरकार सीमित स्तर पर फिर से इसी मॉडल को बढ़ावा देने की बात कर रही है।
वर्क फ्रॉम होम से क्या होंगे फायदे?
वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल का सबसे बड़ा फायदा ईंधन बचत माना जा रहा है। रोज ऑफिस आने-जाने में कम पेट्रोल और डीजल खर्च होगा, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों में कमी आ सकती है।
इसके अलावा कर्मचारियों का सफर में लगने वाला समय बचेगा, जिसे वे परिवार या दूसरे जरूरी कामों में इस्तेमाल कर सकेंगे। कंपनियों को भी ऑफिस स्पेस, बिजली और अन्य सुविधाओं पर कम खर्च करना पड़ेगा।
हर सेक्टर में संभव नहीं है WFH
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हर क्षेत्र में वर्क फ्रॉम होम लागू नहीं किया जा सकता। मैन्युफैक्चरिंग, परिवहन, अस्पताल, रिटेल और अन्य फिजिकल सर्विस सेक्टर में कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी होती है।
लेकिन भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़ी संख्या में ऐसी नौकरियां हैं, जिन्हें आसानी से हाइब्रिड या रिमोट मॉडल में चलाया जा सकता है।
‘ग्रीन वर्क पॉलिसी’ से घट सकता है तेल आयात
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार कंपनियों को प्रोत्साहन दे और राज्यों के साथ मिलकर ग्रीन वर्क पॉलिसी जैसी योजनाएं शुरू करे, तो भारत अपने तेल आयात खर्च में बड़ी कमी ला सकता है। इससे न केवल आर्थिक दबाव कम होगा, बल्कि भारतीय रुपये की स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
