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क्यों धरती के सबसे गर्म स्थानों में से एक बना बांदा? सड़कें तप रहीं, हवा उगल रही आग, 48°C पार पारा

उत्तर प्रदेश का बांदा 48.2°C तापमान के साथ भारत का सबसे गर्म शहर बन गया है। वैज्ञानिकों ने इसे ‘हीट आइलैंड’ बताया है। घटती हरियाली, सूखती नदियां, रेत खनन और जलवायु परिवर्तन को भीषण गर्मी की बड़ी वजह माना जा रहा है।

 
बांदा
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उत्तर प्रदेश का बांदा इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसके बाद बांदा देश का सबसे गर्म शहर बन गया। हालात इतने गंभीर हैं कि यह शहर दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में भी शामिल हो गया है। लगातार कई दिनों से यहां तापमान 48 डिग्री के आसपास बना हुआ है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ दो दिन पहले ही बांदा में तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। अब विशेषज्ञों को आशंका है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो बांदा 10 जून 2019 को दर्ज अपने सर्वकालिक रिकॉर्ड 49.2 डिग्री सेल्सियस को भी पीछे छोड़ सकता है।

वैज्ञानिकों ने बताया क्यों ‘जल’ रहा है बांदा

विशेषज्ञों का कहना है कि बांदा धीरे-धीरे हीट आइलैंड में बदलता जा रहा है। पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, यहां तेजी से घटती हरियाली, सूखती नदियां, अवैध और अंधाधुंध रेत खनन तथा लगातार बढ़ता जलवायु परिवर्तन इस भीषण गर्मी की बड़ी वजह हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बांदा समेत दक्षिणी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए गंभीर लू का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के लखनऊ केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने बताया कि बुंदेलखंड क्षेत्र पर पश्चिमी विक्षोभ का असर बेहद कम पड़ा है, जिसकी वजह से यहां गर्मी और अधिक खतरनाक हो गई है।
 

बांदा की भौगोलिक स्थिति भी बनी बड़ी वजह

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बांदा की भौगोलिक बनावट भी इस भीषण गर्मी को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। बुंदेलखंड का पथरीला इलाका दिन में तेज धूप और गर्मी को तेजी से सोख लेता है और रात में धीरे-धीरे छोड़ता है। इसी कारण यहां रात के समय भी राहत नहीं मिल रही।
 

वैज्ञानिकों का कहना है कि थार रेगिस्तान से आने वाली गर्म और शुष्क पश्चिमी हवाएं तापमान को और ज्यादा बढ़ा रही हैं। इसके चलते दिन के साथ-साथ रातें भी बेहद गर्म हो गई हैं।

पर्यावरण असंतुलन ने बढ़ाई मुश्किल

बांदा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर दिनेश साहा ने कहा कि जिले का पारिस्थितिक संतुलन पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बिगड़ा है। पहले यहां हरियाली और जल स्रोत गर्मी को संतुलित करने में मदद करते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने पर गंभीर काम नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में बांदा में गर्मी और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकती है।