क्यों बदला गया देशभर के राजभवनों का नाम? सरकार ने बताई वजह
नई दिल्ली I केंद्र सरकार के एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत देशभर के राजभवनों का नाम बदलकर 'लोकभवन' कर दिया गया है। यह बदलाव शासन व्यवस्था को औपनिवेशिक छवि से मुक्त कर जनता के करीब लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 25 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि 'राजभवन' को 'लोकभवन' और 'राजनिवास' को 'लोकनिवास' नाम दिया जाए। इसी कड़ी में, सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) परिसर को 'सेवातीर्थ' नाम दिया गया है, जो सेवा भाव को प्रतिबिंबित करता है।
क्यों बदला गया नाम?
सरकार का कहना है कि 'राजभवन' नाम ब्रिटिश शासन की याद दिलाता है, जो सत्ता के प्रतीक के रूप में जाना जाता था। अब इन्हें 'लोकभवन' नाम देकर इन भवनों को आम जनता के लिए अधिक सुलभ और मानवीय बनाने का प्रयास किया जा रहा है। राज्यपालों को अब जनसुनवाई और लोकपाल की भूमिका निभाने का निर्देश दिया गया है, ताकि ये भवन सेवा और कर्तव्य का केंद्र बनें। यह बदलाव अखिल भारतीय राज्यपाल सम्मेलन की सिफारिशों पर आधारित है, जहां बिहार के तत्कालीन राज्यपाल फागू चौहान ने 2022 में इस प्रस्ताव को रखा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप, यह कदम शासन को 'सत्ता' से 'सेवा' की ओर मोड़ने का प्रतीक है।
पिछले वर्षों में मोदी सरकार ने कई नाम बदलाव किए हैं, जैसे राजपथ को कर्तव्य पथ और प्रधानमंत्री आवास को लोक कल्याण मार्ग नाम दिया गया। इसी तरह, केंद्रीय सचिवालय का नाम अब 'कर्तव्य भवन' हो गया है।
पश्चिम बंगाल से हुई शुरुआत, आठ राज्यों में लागू
यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल से शुरू हुई, जहां राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने 29 नवंबर 2025 को कोलकाता, दार्जिलिंग और बैरकपुर फ्लैगस्टाफ हाउस का नाम 'लोकभवन' कर दिया। राज्यपाल बोस ने कहा, "यह बदलाव जनता को राजभवन के करीब लाने की आकांक्षा से प्रेरित है।" इसके बाद अन्य राज्य भी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़े।
अब तक जिन आठ राज्यों ने नाम बदलाव को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है, वे निम्नलिखित हैं:
- पश्चिम बंगाल: कोलकाता और दार्जिलिंग राजभवन।
- तमिलनाडु: चेन्नई राजभवन।
- केरल: तिरुवनंतपुरम राजभवन (2 दिसंबर 2025 को आधिकारिक अधिसूचना जारी)।
- असम: गुवाहाटी राजभवन।
- उत्तराखंड: देहरादून और नैनीताल राजभवन (राज्यपाल गुरमीत सिंह की मंजूरी के बाद 1 दिसंबर से प्रभावी)।
- ओडिशा: भुवनेश्वर राजभवन।
- गुजरात: गांधीनगर राजभवन (राज्यपाल देवव्रत ने एक्स पर घोषणा की)।
- त्रिपुरा: अगरतला राजभवन।
इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में उपराज्यपाल के 'राजनिवास' का नाम 'लोकनिवास' कर दिया गया है। राजस्थान में भी राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के निर्देश पर 1 दिसंबर 2025 से 'लोकभवन' नाम लागू हो गया है।
शेष राज्यों में प्रक्रिया जारी, पूरे देश में होगा विस्तार
गृह मंत्रालय के अनुसार, यह बदलाव सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में अनिवार्य होगा। शेष राज्यों जैसे महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश आदि में अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। विपक्षी शासित राज्यों में भी राज्यपाल-मुख्यमंत्री के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से यह कदम देखा जा रहा है, क्योंकि अब राज्यपालों की भूमिका अधिक जनोन्मुखी होगी।
