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तमिलनाडु में AIADMK ने TVK को दिया समर्थन, क्या विजय की सरकार का रास्ता साफ?

तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। AIADMK ने TVK को बाहर से समर्थन देने का फैसला लिया है, जिससे थलापति विजय की सरकार बनने का रास्ता आसान हो गया है। 7 मई को शपथ ग्रहण की संभावना जताई जा रही है, जबकि सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

 
AIADMK ने TVK को दिया समर्थन
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चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। राज्य की प्रमुख पार्टी AIADMK ने आखिरकार TVK को बाहर से समर्थन देने का फैसला कर लिया है। इस फैसले के बाद थलापति विजय के नेतृत्व में सरकार बनने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस निर्णय के पीछे AIADMK के वरिष्ठ नेता C V षणमुगम और S P वेलूमणी की अहम भूमिका रही है।

पार्टी में बगावत के संकेत, दबाव में लिया गया फैसला

AIADMK के अंदर पिछले कुछ समय से असंतोष बढ़ता जा रहा था। विधायक दल की बैठक टाले जाने के बाद यह साफ हो गया था कि पार्टी के भीतर बड़ा मतभेद चल रहा है।

बताया जा रहा है कि 47 विधायकों में से अधिकांश TVK को समर्थन देने के पक्ष में थे। यहां तक कि 30 से अधिक विधायकों के पार्टी छोड़कर विजय का समर्थन करने की चेतावनी भी सामने आई थी। इस संभावित बगावत का नेतृत्व C V षणमुगम कर रहे थे।

7 मई को हो सकता है शपथ ग्रहण

राज्य सचिवालय में हुई एक अहम बैठक में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों पर चर्चा की गई। इसमें PWD विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।

सूत्रों के अनुसार, चेन्नई के जवाहर लाल इंडोर स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। यदि सभी समीकरण ठीक रहे, तो 7 मई को नई सरकार शपथ ले सकती है।

सीटों का गणित: किसके पास कितनी ताकत?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को हुए थे, जिनके नतीजे 4 मई को घोषित किए गए। इस चुनाव में TVK ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें हासिल कीं और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

TVK: 108 सीट
DMK: 59 सीट
AIADMK: 47 सीट
कांग्रेस: 5 सीट
PMK: 4 सीट

हालांकि, 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में TVK को अभी भी 10 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता थी, जो अब AIADMK के फैसले के बाद संभव होता दिख रहा है।

तमिलनाडु की सियासत में नया मोड़

AIADMK के समर्थन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नया समीकरण बनता नजर आ रहा है। इससे न केवल सरकार गठन का रास्ता साफ हुआ है, बल्कि थलापति विजय की राजनीतिक पकड़ भी मजबूत हुई है।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में कौन-कौन सी पार्टियां इस नए गठबंधन का हिस्सा बनती हैं और सरकार किस तरह स्थिरता हासिल करती है।