स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में कांग्रेस का प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच की मांग
वाराणसी में कांग्रेस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने आरोपों की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की मांग की। कांग्रेस ने एफआईआर पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच और सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
वाराणसी: बाल यौन शोषण के आरोपों में घिरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में कांग्रेस खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के निर्देश पर प्रदेशभर में ज्ञापन सौंपने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में वाराणसी में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपकर मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की मांग की है।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व पर यह अभियान प्रदेशभर में चलाया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने अपने ज्ञापन में कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो।
पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में स्नान के दौरान विवाद की शुरुआत हुई। उन्होंने प्रयागराज के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर अजय पाल शर्मा की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, एक तस्वीर सामने आई है जिसमें पुलिस अधिकारी और एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्ति साथ दिखाई दे रहे हैं, जिससे मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
FIR को बताया फर्जी, स्वतंत्र जांच की मांग
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों को रोका जाना अपमानजनक था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदनंद ब्रह्मचारी और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को कांग्रेस ने फर्जी करार दिया है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि एफआईआर दर्ज कराने वालों की भूमिका की भी जांच की जाए और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
