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कुमार विश्वास से लेकर राघव चड्ढा तक... AAP से किन-किन बड़े नेताओं ने बनाई दूरी?

राघव चड्ढा के इस्तीफे के बाद आम आदमी पार्टी में फिर से अंदरूनी कलह की चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले भी प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास समेत कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। क्या AAP में बढ़ती दरार अब बड़े सियासी संकट का संकेत है?

 
AAP Leaders Exit List
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AAP Leaders Exit List: आम आदमी पार्टी (AAP) एक बार फिर बड़े राजनीतिक झटके का सामना कर रही है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के इस्तीफे और उनके साथ कई सांसदों के पार्टी छोड़ने की खबर ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को फिर उजागर कर दिया है।

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब AAP के किसी बड़े चेहरे ने पार्टी से दूरी बनाई हो, लेकिन इस बार मामला ज्यादा गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह घटनाक्रम संगठन की जड़ों को प्रभावित करता दिख रहा है।

प्रशांत भूषण: सबसे पहले उठे थे सवाल

AAP के शुरुआती दौर में ही वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी एक व्यक्ति केंद्रित होती जा रही है और आंतरिक लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उन्होंने फंडिंग की पारदर्शिता और एथिक्स कमेटी की मांग भी की थी। इसके बाद उनका पार्टी से अलग होना AAP के भीतर पहली बड़ी दरार माना गया।

योगेंद्र यादव: ‘आंदोलन से राजनीति’ तक की नाराजगी

राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने भी पार्टी से अलग होते समय साफ कहा था कि AAP अपने मूल उद्देश्य से भटक रही है। उनका मानना था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब पारंपरिक राजनीति जैसा बनता जा रहा है। बाद में उन्होंने ‘स्वराज अभियान’ के जरिए अलग राजनीतिक रास्ता चुना।

शाजिया इल्मी: आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल

शाजिया इल्मी ने 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी छोड़ दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है और फैसले सीमित दायरे में लिए जा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने BJP का दामन थाम लिया।

कुमार विश्वास: मतभेद और किनारे किए जाने का आरोप

AAP के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल रहे कुमार विश्वास भी धीरे-धीरे पार्टी से दूर हो गए। उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा कि वे पार्टी के भीतर गलत नीतियों का विरोध करते थे, जिसकी वजह से उन्हें साइडलाइन किया गया। उनका अलग होना AAP के लिए बड़ा राजनीतिक और भावनात्मक झटका माना गया।

कपिल मिश्रा: भ्रष्टाचार के आरोप से मचा था तूफान

कपिल मिश्रा ने तो पार्टी नेतृत्व पर सीधे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा दिए थे। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने खुद मुख्यमंत्री आवास पर पैसे का लेनदेन होते देखा। इसके बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया और वे बाद में BJP में शामिल हो गए।

स्वाति मालीवाल और हालिया विवाद

हाल के समय में राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से जुड़े विवाद ने भी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने पार्टी के भीतर हुए घटनाक्रमों को लेकर गंभीर आरोप लगाए, जिससे यह संकेत मिला कि अंदरूनी असंतोष अभी भी खत्म नहीं हुआ है।

अब राघव चड्ढा: क्या बढ़ती दरार का नया अध्याय?

इन सभी घटनाओं के बीच अब राघव चड्ढा का इस्तीफा AAP के लिए एक और बड़ा झटका बनकर सामने आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेदों का परिणाम है। उनके साथ अन्य सांसदों का जाना इस बात का संकेत देता है कि आने वाले समय में पार्टी के भीतर और भी बदलाव संभव हैं।