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नंदीग्राम में ममता खेमे की उम्मीदवार ने अचानक छोड़ा मैदान, शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद बदला फैसला

Nandigram Bypoll 2026: ममता बनर्जी के खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के कुछ घंटे बाद नंदीग्राम उपचुनाव से नाम वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। घटनाक्रम से बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
 
नंदीग्राम
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पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में शुक्रवार को अचानक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया। ममता बनर्जी के खेमे से उम्मीदवार बनाई गईं संचिता प्रधान डे ने चुनावी मैदान से अपना नाम वापस ले लिया। खास बात यह है कि नामांकन वापस लेने से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और नंदीग्राम से विधायक शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके चुनाव से हटने को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।

संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस लेने के कारणों को लेकर सार्वजनिक तौर पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है। उनका यह फैसला ऐसे समय आया है, जब नंदीग्राम उपचुनाव में मतदान में करीब तीन सप्ताह का समय बचा है।

शुभेंदु अधिकारी से नबन्ना में हुई मुलाकात

रिपोर्ट के मुताबिक, संचिता प्रधान डे अपने पति सत्यजीत के साथ शुक्रवार को राज्य सचिवालय नबन्ना पहुंचीं। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। मुलाकात के कुछ ही घंटे बाद उन्होंने नंदीग्राम उपचुनाव से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली।

संचिता को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे ने 13 सितंबर को नंदीग्राम से अपना उम्मीदवार घोषित किया था। ऐसे में कुछ ही दिनों बाद उनका चुनावी मैदान से हटना ममता खेमे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

हालांकि, केवल मुलाकात और उसके बाद नाम वापस लेने के आधार पर किसी राजनीतिक समझौते या दबाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। संचिता ने अपने फैसले की वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की है।

एक दिन पहले नामांकन वापस लेने का फैसला

नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख शनिवार है। उससे ठीक एक दिन पहले संचिता ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का फैसला किया।

India Today के मुताबिक, यह घटनाक्रम उस दिन सामने आया जब चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद के बीच दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए। ऐसे में एक ही दिन पार्टी के चुनाव चिह्न और नंदीग्राम उम्मीदवार से जुड़े घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को और गरमा दिया।

ममता खेमे ने अब कांग्रेस को समर्थन दिया

संचिता के नाम वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर अपनी रणनीति साफ कर दी। उन्होंने कहा कि उनका खेमे अब इस सीट पर कोई नया उम्मीदवार नहीं उतारेगा और कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देगा।

ममता ने विपक्षी एकजुटता और INDIA गठबंधन के प्रति समर्थन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में विपक्षी दलों को साथ आना चाहिए। उनके मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनसे फोन पर बात की थी और अन्य विपक्षी नेताओं से भी बातचीत हुई थी।

इस फैसले के बाद नंदीग्राम में मुकाबले का समीकरण बदल गया है। ममता खेमे की ओर से अलग उम्मीदवार नहीं होने के कारण कांग्रेस प्रत्याशी को विपक्षी वोटों को एकजुट करने की कोशिश करनी होगी।

नंदीग्राम में बीजेपी की तरफ से शुभेंदु अधिकारी

नंदीग्राम उपचुनाव में बीजेपी की ओर से मौजूदा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मैदान में हैं। नंदीग्राम उनके लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सीट रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इसी सीट से ममता बनर्जी को हराया था।

2026 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत हासिल की थी। बाद में उनके द्वारा सीट खाली किए जाने के कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी। अब एक बार फिर नंदीग्राम का चुनाव शुभेंदु अधिकारी और विपक्षी खेमे के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।

तृणमूल कांग्रेस में पार्टी नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद

संचिता के नाम वापस लेने का घटनाक्रम ऐसे समय आया है, जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद चल रहा है।

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के बीच विवाद के कारण आगामी उपचुनाव के लिए पारंपरिक तृणमूल कांग्रेस नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न को फिलहाल रोक दिया है। इसके बाद दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए गए हैं।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे असंवैधानिक, गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक बताया है।

नंदीग्राम उपचुनाव पर अब सबकी नजर

संचिता प्रधान डे के अचानक चुनाव से हटने और ममता बनर्जी के कांग्रेस को समर्थन देने के बाद नंदीग्राम उपचुनाव का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। एक तरफ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के उम्मीदवार हैं, वहीं अब कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को ममता खेमे का समर्थन हासिल है।

ऐसे में आने वाले दिनों में नंदीग्राम में विपक्षी वोटों का समीकरण, कांग्रेस और ममता खेमे के बीच जमीनी तालमेल और बीजेपी की चुनावी रणनीति पर सबकी नजर रहेगी। नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को मतदान होना है और इसके नतीजे राज्य की मौजूदा सियासी तस्वीर के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।