महिलाओं के साथ छल कर रहा विपक्ष: वाराणसी में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का बड़ा बयान, कहा- जश्न मना रहा विपक्ष
वाराणसी में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने की प्रक्रिया विपक्ष की असहमति के कारण अटकी है। सरकार ने सीटें बढ़ाकर 815 करने का प्रस्ताव रखा था, जिस पर सियासत तेज है।
वाराणसी: केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने की प्रक्रिया को रोककर विपक्ष ने नारी शक्ति के साथ छल किया है।
विपक्ष का जश्न महिलाओं का अपमान
सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि इस विधेयक को आगे बढ़ने से रोकने के बाद कुछ विपक्षी दलों द्वारा खुशी जाहिर करना महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगी और समय आने पर इसका जवाब देंगी।
बजट सत्र में हुआ था अहम विधेयकों पर मंथन
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद के विशेष सत्र में तीन प्रमुख विधेयकों पर संयुक्त चर्चा हुई थी। इनमें सबसे अहम 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026 था, जिसका उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करना है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है, जो कोविड-19 के चलते समय पर नहीं हो सका, जिससे देरी हुई।
लोकसभा सीटें बढ़ाकर 815 करने का प्रस्ताव
सरकार की योजना के तहत महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 815 करने का प्रस्ताव रखा गया। इसमें 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की बात कही गई है। साथ ही दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी शामिल है।
विपक्ष में मतभेद, सहमति नहीं बन पाई
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच एकराय नहीं बन सकी। समाजवादी पार्टी ने धर्म आधारित आरक्षण की मांग उठाई, डीएमके ने दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जताई, जबकि कांग्रेस ने परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। सरकार की ओर से कहा गया कि सभी राज्यों के हितों का संतुलन बनाए रखा जाएगा, लेकिन राजनीतिक सहमति न बनने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
महिला आरक्षण फिलहाल अधर में
राजनीतिक सहमति के अभाव में महिलाओं को 33% आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया फिलहाल अधूरी रह गई है। सरकार इसे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष के विरोध के चलते यह मुद्दा सियासी विवाद का केंद्र बन गया है।
