संसद की सर्वदलीय बैठक में ऐसा क्या हुआ कि पूरा विपक्ष एक साथ वॉकआउट कर गया?
संसद के मॉनसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में TMC के 20 बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने पर कांग्रेस, सपा, DMK, AAP समेत विपक्ष ने वॉकआउट किया। विपक्ष ने इसे संविधान के खिलाफ बताया, जबकि बाद में इसे सांकेतिक विरोध बताते हुए सभी दल बैठक में लौट आए।
Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक सियासी टकराव की वजह से सुर्खियों में आ गई। संसद भवन एनेक्सी में हुई इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, वाम दलों और अन्य विपक्षी दलों ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए बैठक से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, कुछ देर बाद इसे 'सांकेतिक विरोध' बताते हुए सभी विपक्षी नेता फिर बैठक में शामिल हो गए।
TMC के 20 बागी सांसदों को बुलाने पर शुरू हुआ विवाद
विवाद की जड़ TMC के उन 20 सांसदों को बैठक में शामिल करना रहा, जिन्होंने अलग होकर NCPI नामक राजनीतिक दल का गठन किया है। विपक्ष का आरोप है कि इन सांसदों को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की ओर से औपचारिक मान्यता नहीं मिली है और इनके खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाएं अब भी लंबित हैं। ऐसे में उन्हें अलग संसदीय दल मानकर बैठक में बुलाना संसदीय परंपराओं और संविधान दोनों के खिलाफ है।
महुआ मोइत्रा ने उठाए बड़े सवाल
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि संसद की सूची में TMC के सांसदों की संख्या गलत तरीके से दर्शाई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बागी सांसदों के विलय को अभी तक स्पीकर की मंजूरी नहीं मिली और 91वें संविधान संशोधन के बाद अलग गुट की व्यवस्था समाप्त हो चुकी है, तो आखिर संसदीय कार्य मंत्रालय ने उन्हें किस आधार पर आमंत्रित किया।
महुआ ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दल और शिवसेना (UBT) सहित पूरा विपक्ष इस फैसले के विरोध में एकजुट है।
विपक्ष का आरोप- संविधान और लोकतंत्र से समझौता
बैठक से बाहर आने के बाद विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर संविधान की अनदेखी करने का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि अंतिम निर्णय से पहले बागी सांसदों को अलग पहचान देना पूरी तरह असंवैधानिक है और कांग्रेस ने संविधान की रक्षा के लिए विरोध दर्ज कराया।
वहीं शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके तहत लंबित मामलों के बावजूद अलग संसदीय पहचान दी जा सके।
आम आदमी पार्टी के सांसद एन.डी. गुप्ता ने भी आरोप लगाया कि राज्यसभा में उनकी पार्टी के सांसदों के मामले में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई और लंबित याचिकाओं के बावजूद अलग सीटें आवंटित कर दी गईं।
बागी सांसदों ने कहा- विकास के लिए लिया फैसला
दूसरी ओर, NCPI में शामिल TMC की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सरकार के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपने निर्वाचन क्षेत्रों और राज्य के विकास के लिए काम करना है। उन्होंने बताया कि लोकसभा सचिवालय द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज जमा किए जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की जा रही है।
सांकेतिक विरोध के बाद बैठक में लौटा विपक्ष
तीखे विरोध और वॉकआउट के बाद विपक्षी दलों ने दोबारा बैठक में शामिल होने का फैसला किया। नेताओं ने कहा कि उनका विरोध सरकार के फैसले के खिलाफ एक सांकेतिक संदेश था। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के मॉनसून सत्र में वे जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे और सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।
