150 अवैध नौकरियों की सिफारिश… TMC के बड़े नेता सुजीत बोस को ED ने किया गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद पहली बड़ी राजनीतिक गिरफ्तारी हुई है। पूर्व मंत्री और TMC नेता सुजीत बोस को ED ने नगरपालिका भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने अवैध भर्ती, नकद लेनदेन और लग्जरी फ्लैट्स से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य में बीजेपी सरकार बनने के बाद पहली बड़ी राजनीतिक गिरफ्तारी करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता सुजीत बोस को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले की जांच के तहत की गई है।
बताया जा रहा है कि 11 मई को ED ने सुजीत बोस से करीब साढ़े 10 घंटे तक लंबी पूछताछ की। जांच एजेंसी का आरोप है कि पूछताछ के दौरान बोस लगातार बयान बदल रहे थे और जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। इसके बाद एजेंसी ने उन्हें हिरासत में लेने का फैसला किया।
क्या है नगरपालिका भर्ती घोटाला?
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला ‘साउथ दमदम’ नगरपालिका में कथित अवैध भर्ती से जुड़ा हुआ है। ED का दावा है कि सुजीत बोस ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए करीब 150 उम्मीदवारों की नौकरी के लिए सिफारिश की थी।
उस समय सुजीत बोस दमदम नगर पालिका के उपाध्यक्ष थे। आरोप है कि इन नियुक्तियों के बदले उन्होंने आर्थिक लाभ हासिल किया। जांच के दौरान एजेंसी को कई ऐसे लग्जरी फ्लैट्स के दस्तावेज मिले हैं जिन्हें कथित तौर पर नौकरी दिलाने के बदले प्राप्त किया गया था।
बैंक खातों में भारी नकद जमा होने का दावा
ED ने यह भी दावा किया है कि जांच में सुजीत बोस से जुड़े बैंक खातों में भारी मात्रा में नकद जमा होने के प्रमाण मिले हैं। एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक परतों की भी जांच कर रही है।
बताया जा रहा है कि कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने इस मामले में FIR दर्ज की थी। इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू की।
पहले भी हो चुकी है छापेमारी
इस मामले में ED ने 10 अक्टूबर 2025 को पश्चिम बंगाल के 13 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की थी। इन छापों में सुजीत बोस और राज्य के पूर्व अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मंत्री से जुड़े परिसरों को भी शामिल किया गया था।
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज और लगभग 45 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। इसके बाद से ही सुजीत बोस एजेंसी की निगरानी में थे।
चुनाव प्रचार के दौरान मिला था समन
सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच ED ने सुजीत बोस को पहला समन 2 अप्रैल को भेजा था। इसके बाद 6 अप्रैल को दूसरा समन जारी किया गया। हालांकि बोस ने चुनावी व्यस्तता का हवाला देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में राहत की मांग की थी।
बाद में वह 1 मई को ED के सामने पेश हुए थे। इसके ठीक 11 दिन बाद एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
कौन हैं सुजीत बोस?
सुजीत बोस पश्चिम बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। वह उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने पहली बार 2009 के उपचुनाव में जीत दर्ज की थी।
हालिया विधानसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी उम्मीदवार शरदवत मुखर्जी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि वह करीब 37 हजार वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थे।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत में सुजीत बोस CPI(M) नेता सुभाष चक्रवर्ती के करीबी माने जाते थे, लेकिन बाद में दोनों के रिश्तों में दूरी आ गई। इसके बाद उन्होंने 2001 में TMC का दामन थाम लिया। 2021 में ममता सरकार बनने के बाद उन्हें मंत्री पद मिला था।
गिरफ्तारी के बाद बढ़ी सियासी हलचल
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहली बड़ी राजनीतिक गिरफ्तारी मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े नेताओं पर कार्रवाई हो सकती है।
राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि पिछली सरकार के दौरान सामने आए भ्रष्टाचार के मामलों की गहन जांच कराई जाएगी। ऐसे में सुजीत बोस की गिरफ्तारी को बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
