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108 सीट जीतकर भी फंसे ‘थलापति’ विजय! सरकार के लिए चाहिए 10 का सहारा, कौन बनेगा किंगमेकर?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में टीवीके प्रमुख थलापति विजय ने 108 सीटों के साथ बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन बहुमत से पीछे रह गए। अब सरकार बनाने के लिए सहयोगियों की तलाश तेज है। कांग्रेस, एआईएडीएमके समेत कई दलों की भूमिका अहम हो सकती है। शपथ ग्रहण 7 मई को संभव।

 
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव
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चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में नई पार्टी टीवीके के प्रमुख थलापति विजय ने जोरदार एंट्री करते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज की है। हालांकि, 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, जिससे विजय बहुमत से 10 सीट पीछे रह गए हैं।

ऐसे में अब साफ हो गया है कि जीत के बावजूद टीवीके को सरकार बनाने के लिए गठबंधन का सहारा लेना पड़ेगा और राज्य की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका अहम हो गई है।

विधायकों ने विजय को चुना नेता, सरकार गठन की तैयारी तेज

चुनाव परिणाम के बाद थलापति विजय ने पार्टी की कार्यकारी समिति और नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई। इस बैठक में सभी विधायकों ने समर्थन पत्र सौंपते हुए सर्वसम्मति से विजय को विधायक दल का नेता और मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार चुन लिया।

इसके साथ ही राज्य में सरकार गठन की कवायद तेज हो गई है।

7 मई को हो सकती है शपथ, राज्यपाल दे सकते हैं न्योता

सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर जल्द ही टीवीके को सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।

संभावना जताई जा रही है कि थलापति विजय 7 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। हालांकि, उन्हें सदन में बहुमत साबित करने के लिए समय मांगना पड़ सकता है।

कौन बनेगा ‘किंगमेकर’? कांग्रेस या एआईएडीएमके पर नजर

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विजय की सरकार को समर्थन कौन देगा।

कांग्रेस खेमे में इस मुद्दे पर चर्चा तेज है। कई विधायकों का मानना है कि टीवीके का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान ही करेगा।

वहीं, एआईएडीएमके ने भी अपने विधायकों की बैठक बुलाकर समर्थन पर विचार करने के संकेत दिए हैं। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

डीएमके और भाजपा से दूरी, विकल्प सीमित

राजनीतिक समीकरणों को देखें तो टीवीके के डीएमके या भाजपा के साथ जाने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। चुनाव से पहले ही विजय इन दलों को अपना वैचारिक विरोधी बता चुके हैं।

डीएमके की सहयोगी पार्टी डीएमडीके ने भी साफ किया है कि उसे अभी तक टीवीके की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है और वह अपने मौजूदा गठबंधन में ही बनी रहेगी।

छोटे दल भी बने निर्णायक, हर समर्थन की अहमियत

विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) जैसे छोटे दलों ने भी अभी समर्थन पर फैसला नहीं लिया है। ऐसे में हर सीट का गणित बेहद अहम हो गया है और विजय को बहुमत के लिए हर संभावित सहयोगी की जरूरत पड़ेगी।