ममता बनर्जी के आखिर 60 विधायक क्यों हुए बागी, क्या अभिषेक बनर्जी बन रहे हैं TMC के लिए सबसे बड़ा खतरा?
TMC Rebel MLAs: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सियासी भूचाल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर मचा हुआ है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पहली बार विधायक बने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी खेमे ने खुद को “असली TMC” बताना शुरू कर दिया है। सबसे बड़ा दावा यह है कि करीब 60 विधायक उनके समर्थन में हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP में हुई बगावत से की जा रही है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल का यह संकट महाराष्ट्र मॉडल से काफी अलग है, क्योंकि यहां मामला विचारधारा से ज्यादा नेतृत्व और सत्ता के नियंत्रण का बताया जा रहा है।
आखिर कैसे शुरू हुआ TMC में बगावत का संकट?
तृणमूल कांग्रेस में विवाद उस समय खुलकर सामने आया जब पार्टी के भीतर आरोप लगा कि नेता प्रतिपक्ष के समर्थन से जुड़े एक पत्र में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से लगाए गए।
यह आरोप सामने आने के बाद विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा सचिवालय में शिकायत दर्ज कराई। इसके कुछ ही घंटों बाद पार्टी ने दोनों नेताओं को “विरोधी गतिविधियों” के आरोप में बाहर का रास्ता दिखा दिया।
इसके बाद बंगाल की राजनीति में घटनाक्रम तेजी से बदलने लगा। बागी खेमे ने दावा किया कि उनके साथ 60 विधायक हैं और उन्होंने विधानसभा स्पीकर को समर्थन पत्र भी सौंप दिया है।
ममता के खिलाफ नहीं, लेकिन अभिषेक पर बड़ा हमला
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि बागी खेमे ने ममता बनर्जी के नेतृत्व को खुली चुनौती नहीं दी। बागी विधायक लगातार यह कहते नजर आए कि वे अलग पार्टी नहीं बना रहे हैं और TMC के झंडे के नीचे ही काम करना चाहते हैं।
हालांकि दूसरी तरफ बगावत का सबसे बड़ा निशाना अभिषेक बनर्जी बनते दिखाई दे रहे हैं। पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी और उनके करीबी सलाहकारों की वजह से पुराने नेताओं को लगातार किनारे किया जा रहा है।
कई नेताओं का यह भी दावा है कि पार्टी संचालन में राजनीतिक सलाहकार संस्था I-PAC का दखल बढ़ने के बाद संगठन में पुराने नेताओं की भूमिका कमजोर कर दी गई।
ममता की बैठकों से गायब होने लगे विधायक
पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी के संकेत पिछले कुछ समय से मिल रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में ममता बनर्जी के आवास पर हुई बैठक में 80 में से करीब 60 विधायक शामिल नहीं हुए थे।
इतना ही नहीं, चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी के पहले सड़क प्रदर्शन में भी बेहद कम विधायक और सांसद पहुंचे। इसे पार्टी के भीतर गहराते असंतोष का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
महाराष्ट्र मॉडल से क्यों हो रही तुलना?
राजनीतिक विश्लेषक TMC संकट की तुलना महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे और अजित पवार की बगावत से कर रहे हैं। हालांकि दोनों मामलों में बड़ा अंतर भी बताया जा रहा है।
शिवसेना और NCP की बगावत विचारधारा और लंबे समय से चल रहे राजनीतिक मतभेदों से जुड़ी थी। शिवसेना में 2019 में कांग्रेस-NCP के साथ गठबंधन के बाद असंतोष शुरू हुआ था, जो बाद में बड़ी बगावत में बदल गया।
लेकिन TMC के मामले में राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यहां विचारधारा नहीं बल्कि नेतृत्व और सत्ता की राजनीति बड़ा कारण है।
“TMC विचारधारा नहीं, सत्ता के सहारे खड़ी पार्टी”
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TMC के भीतर नेताओं को जोड़कर रखने वाला सबसे बड़ा तत्व सत्ता था, न कि कोई ठोस वैचारिक आधार।
2021 विधानसभा चुनाव से पहले भी कई बड़े नेता BJP में चले गए थे। हालांकि चुनाव में TMC की बड़ी जीत के बाद वही नेता वापस पार्टी में लौट आए थे।
राजनीतिक विश्लेषक सायंतन घोष ने इसे “विद्रोह नहीं बल्कि सत्ता संघर्ष” बताया है। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर वफादारी का आधार कमजोर पड़ चुका है।
BJP ने भी साधा निशाना
BJP नेताओं ने भी TMC के भीतर जारी संकट पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि TMC को जोड़कर रखने वाला “साझा विजन नहीं बल्कि सत्ता और भ्रष्टाचार का नेटवर्क” था।
उन्होंने दावा किया कि जैसे-जैसे पार्टी की सत्ता कमजोर हुई, वैसे-वैसे नेताओं के बीच दरार भी खुलकर सामने आने लगी।
अब ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती
पूरा घटनाक्रम अब ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब ममता को तय करना होगा कि वह अभिषेक बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ी रहती हैं या पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को साधने की कोशिश करती हैं।
फिलहाल बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ममता बनर्जी एक बार फिर पार्टी को एकजुट रखने में सफल होंगी या TMC के भीतर यह बगावत आगे और बड़ा रूप लेगी।
