BJP से आखिर क्यों नाराज हैं अन्नामलाई? 5 बड़े कारणों ने बढ़ाई बगावत की चर्चा
तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई के दिल्ली दौरे ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। चर्चा है कि वह बीजेपी से इस्तीफा देकर नई पार्टी बना सकते हैं। AIADMK गठबंधन, प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने और चुनावी रणनीति को लेकर पार्टी नेतृत्व से उनके मतभेद सामने आए हैं।
K Annamalai BJP Resignation: तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई के दिल्ली पहुंचने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अन्नामलाई भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे सकते हैं। माना जा रहा है कि वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपने फैसले की जानकारी दे सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, के. अन्नामलाई स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनने की तैयारी में हैं। हालांकि उन्होंने अब तक किसी नई पार्टी या इस्तीफे को लेकर औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके हालिया बयान और तमिलनाडु में लगाए गए पोस्टरों ने अटकलों को और तेज कर दिया है।
जन्मदिन पर बड़ी घोषणा की चर्चा
तमिलनाडु के मदुरै और कोयंबटूर समेत कई इलाकों में अन्नामलाई के समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में समर्थकों ने उनसे तमिलनाडु को “बचाने” के लिए नया राजनीतिक रूप अपनाने की अपील की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई चार जून को अपने जन्मदिन के मौके पर बड़ा ऐलान कर सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि वह नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा भी कर सकते हैं।
जब इस पूरे घटनाक्रम पर उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “कुछ दिन इंतजार कीजिए, सब साफ हो जाएगा।”
AIADMK के साथ गठबंधन बना नाराजगी की बड़ी वजह
के. अन्नामलाई लगातार भाजपा और AIADMK के गठबंधन का विरोध करते रहे हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तमिलनाडु में अकेले चुनाव लड़ा था और AIADMK एनडीए से अलग रही थी। भाजपा ने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 11.24 प्रतिशत वोट हासिल किए, लेकिन पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। खुद अन्नामलाई को कोयंबटूर सीट से हार का सामना करना पड़ा।
इसके बावजूद भाजपा नेतृत्व ने AIADMK के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए, जिससे अन्नामलाई कथित तौर पर नाराज हो गए।
प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने से बढ़ी दूरी
अन्नामलाई ने 2021 से 2025 तक तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने राज्य में भाजपा को मजबूत पहचान दिलाई और आक्रामक राजनीति के जरिए खुद को बड़ा चेहरा बनाया।
लेकिन अप्रैल 2025 में भाजपा नेतृत्व ने उनकी जगह नैनार नागेंद्रन को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, AIADMK महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी ने भाजपा से गठबंधन वार्ता शुरू करने के लिए अन्नामलाई को हटाने की शर्त रखी थी।
बताया जाता है कि AIADMK नेतृत्व, अन्नामलाई द्वारा पहले की गई तीखी टिप्पणियों और आलोचनाओं से नाराज था, जिससे दोनों दलों के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था।
2026 विधानसभा चुनाव में खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे थे अन्नामलाई
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के दौरान भी अन्नामलाई की नाराजगी खुलकर सामने आई। खबरों के अनुसार पार्टी के अहम फैसलों और रणनीति निर्माण में उन्हें पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा था।
सूत्रों का कहना है कि इसी वजह से उन्होंने चुनाव लड़ने से भी इनकार कर दिया था। इससे भाजपा नेतृत्व और अन्नामलाई के बीच दूरी और बढ़ गई।
नीतिगत मुद्दों पर भी जताई थी असहमति
के. अन्नामलाई ने भाजपा की कुछ नीतियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल भी उठाए थे। खासकर स्कूलों में तीन-भाषा नीति लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले की टाइमिंग पर उन्होंने आपत्ति जताई थी।
उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु जैसे संवेदनशील राज्य में ऐसे मुद्दों को सावधानी से लागू किया जाना चाहिए। अन्नामलाई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से संबंधित अधिसूचना वापस लेने की भी मांग की थी।
चुनावी रणनीति और सीट बंटवारे को लेकर भी मतभेद
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार गठबंधन प्रबंधन, उम्मीदवार चयन और सीट बंटवारे जैसे मुद्दों पर भी अन्नामलाई और भाजपा नेतृत्व के बीच लगातार मतभेद बने हुए थे।
अब उनके दिल्ली दौरे और संभावित नई राजनीतिक पारी को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। यदि अन्नामलाई नई पार्टी बनाते हैं, तो इसका असर 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है।
