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रातों-रात बना व्हाट्सऐप ग्रुप, अचानक आई भीड़ ने किया हंगामा...जानें नोएडा में कैसे भड़की हिंसा की आग

 
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नोएडा: गौतमबुद्धनगर जिले में सोमवार को हुए हिंसक प्रदर्शन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, आगजनी और तोड़फोड़ करने वाले असली फैक्ट्री कर्मचारी नहीं थे, बल्कि कर्मचारियों की आड़ में शामिल बाहरी उपद्रवी थे। पूरे मामले में अब साजिश की आशंका जताई जा रही है।

कमिश्नर लक्ष्मी सिंह का बड़ा बयान

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि मामला पहले ही शांत हो चुका था, लेकिन अचानक कुछ लोग बाहर से आकर हिंसा करने लगे। उन्होंने कहा कि ये भीड़ आसपास के गांवों से आई और सुनियोजित तरीके से माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई।

रातों-रात बने व्हाट्सऐप ग्रुप, QR कोड से जोड़े गए लोग

पुलिस जांच में सामने आया है कि कई व्हाट्सऐप ग्रुप रातों-रात बनाए गए। QR कोड के जरिए लोगों को जोड़ा गया। प्रदर्शन को हिंसक बनाने के लिए उकसाया गया। यह डिजिटल तरीके से भीड़ को संगठित करने की एक नई रणनीति मानी जा रही है।

150 से ज्यादा लोग हिरासत में

पुलिस ने अब तक 150 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कितने लोग असली कर्मचारी थे। कितने बाहरी तत्व शामिल थे। इसके पीछे कौन सा नेटवर्क या संगठन काम कर रहा था

बिना लीडर के चल रहा था प्रदर्शन

सूत्रों के मुताबिक पिछले 4 दिनों से प्रदर्शन जारी था। कोई स्पष्ट नेता सामने नहीं आया। अलग-अलग कंपनियों के कर्मचारी इकट्ठा होकर प्रदर्शन कर रहे थे

क्या हैं श्रमिकों की मांगें?

कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा। 10-12 हजार रुपये में गुजारा मुश्किल। 12 घंटे काम, लेकिन ओवरटाइम नहीं। नाइट ड्यूटी अलाउंस भी नहीं दिया जाता। यही असंतोष धीरे-धीरे आंदोलन में बदल गया।

सरकार का दावा और एक्शन

योगी आदित्यनाथ सरकार का कहना है कि कर्मचारियों से बातचीत कर सहमति बन चुकी थी, फिर भी कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। सरकार ने हाईलेवल कमेटी का गठन किया। औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई
उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

साजिश की जांच जारी

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह था?