Movie prime

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज, 14 जिलाध्यक्ष होंगे नियुक्त

 
bjp
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन को मजबूत करने की तैयारियां एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगी हैं। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के 98 संगठनात्मक जिलों में से शेष बचे 14 जिलों के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर है। इन नियुक्तियों के बाद प्रदेश और क्षेत्रीय स्तर पर संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया भी शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व की प्राथमिकता पहले इन 14 जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पूरी करने की है। इसके बाद अगले महीने से प्रदेश स्तरीय संगठन में बदलाव को लेकर मंथन शुरू किया जाएगा। इससे पहले नियुक्त किए गए 84 जिलाध्यक्षों को लेकर उठ रहे सवालों और कई जिलों में जारी अंदरूनी खींचतान को संभालना भी नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

गौरतलब है कि प्रदेश संगठन के चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडे ने दो चरणों में 84 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की थी, लेकिन जनप्रतिनिधियों के बीच सहमति न बन पाने और आपसी खींचतान के चलते 14 जिलों में नियुक्ति प्रक्रिया अधूरी रह गई थी। इन जिलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है।

पंकज चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद परिचयात्मक दौरों के जरिए कार्यकर्ताओं से संवाद शुरू कर दिया है। उनके बयानों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि आगामी संगठनात्मक फैसलों में कैडर आधारित और सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में संगठनात्मक संतुलन और जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, जिन 14 जिलों में अब तक जिलाध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हो सकी है, उनमें अंबेडकरनगर, गोंडा, अयोध्या जिला व महानगर, वाराणसी जिला, चंदौली, मिर्जापुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शामली, सहारनपुर और अमरोहा शामिल हैं। इन जिलों में क्षेत्रीय विधायकों और दावेदारों के बीच मतभेद के कारण सहमति नहीं बन पाई थी।

बताया जा रहा है कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में जातीय समीकरणों और जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों ने प्रक्रिया को जटिल बना दिया था। कई जिलों में मौजूदा अध्यक्षों की दोबारा या तीसरी बार दावेदारी भी विवाद की वजह बनी। इसी बीच नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद अब इन सभी जिलों में संतुलन साधने की जिम्मेदारी सीधे उनके कंधों पर आ गई है।

नए पैनल पर होगा अंतिम फैसला

सूत्रों की मानें तो शेष 14 जिलों के लिए संबंधित क्षेत्रीय संगठनों से तीन-तीन नामों के नए पैनल मांगे गए हैं। पुराने पैनल मौजूद होने के बावजूद नए प्रदेश अध्यक्ष ने नए सिरे से नाम भेजने के निर्देश दिए हैं। इन पैनलों पर अंतिम निर्णय के बाद जिलाध्यक्षों की घोषणा की जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश और क्षेत्रीय संगठन में व्यापक स्तर पर फेरबदल की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।