यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव का महिलाओं पर फोकस, गरीब महिलाओं को ₹40 हजार देने का वादा फिर चर्चा में
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी महिलाओं को आर्थिक मदद देने के अपने वादे को लगातार चर्चा में बनाए रखने की कोशिश कर रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ का विज्ञापन साझा कर गरीब महिलाओं को 40 हजार रुपये देने का वादा फिर दोहराया।
पार्टी की रणनीति है कि चुनावी घोषणा पत्र जारी होने से पहले महिला मतदाताओं के बीच इस योजना को लेकर चर्चा बनी रहे। इसके लिए सपा पहले भी महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण से जुड़े कई वादे सामने रख चुकी है।
*मार्च 2025 में हुई थी योजना की घोषणा*
अखिलेश यादव ने मार्च 2025 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ की घोषणा की थी। इसके बाद मार्च 2026 में मूर्ति देवी-मालती देवी महिला सम्मान समारोह के दौरान उन्होंने गरीब महिलाओं को 40 हजार रुपये देने का वादा दोहराया। साथ ही समाजवादी पेंशन योजना को फिर से शुरू करने की बात भी कही थी।
अगस्त में अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव ने इस योजना को विस्तार देते हुए महिलाओं के कल्याण से जुड़े पार्टी के चुनावी वादों के रूप में पेश किया था।
*लैपटॉप, साइकिल और नौकरियों में आरक्षण का भी वादा*
महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के अलावा समाजवादी पार्टी छात्राओं को लैपटॉप और साइकिल देने, महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने जैसे वादे भी सामने रख चुकी है।
अखिलेश यादव अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूले में ‘ए’ का अर्थ आधी आबादी यानी महिलाओं से भी जोड़ते रहे हैं। पार्टी महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उनके आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण को प्रमुख मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।
*26 नवंबर को जारी होगा घोषणा पत्र*
समाजवादी पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र 26 नवंबर को जारी होना है। ऐसे में घोषणा पत्र से पहले ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ का प्रचार दोबारा तेज करना चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी चाहती है कि योजना का नाम और महिलाओं को 40 हजार रुपये देने का वादा चुनावी चर्चा में बना रहे।
हालांकि, इस वादे को लेकर सबसे अहम सवाल इसके क्रियान्वयन, पात्रता और बजट से जुड़े हैं। घोषणा पत्र में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सपा महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की योजना को किस रूप में पेश करती है और इसे लागू करने के लिए क्या खाका तैयार करती है।
चुनावी वादे को व्यावहारिक योजना में बदलने के लिए इन पहलुओं पर स्पष्टता जरूरी होगी। ऐसे में अब नजरें 26 नवंबर को जारी होने वाले सपा के घोषणा पत्र पर टिकी हैं, जहां महिलाओं के लिए किए गए वादों की तस्वीर और साफ हो सकती है।
