अयोध्या : रामलला की सेवा में अब एक जैसा पहनावा, 15 अगस्त से अर्चकों के लिए लागू होगा नया ड्रेस कोड
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की सेवा-पूजा करने वाले अर्चकों के लिए 15 अगस्त से नया ड्रेस कोड लागू होने जा रहा है। धर्म समिति के निर्णय के मुताबिक अब सभी अर्चक एक समान पीले रंग की रेशमी धोती और उत्तरीय यानी अंगवस्त्र धारण करेंगे। मंदिर में यह व्यवस्था सेवा-पूजा के दौरान अनुशासन, एकरूपता और धार्मिक गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।
पीतांबरी रेशमी परिधान में नजर आएंगे अर्चक
15 अगस्त से रामलला की नित्य सेवा में लगे सभी अर्चक निर्धारित पीतांबरी रेशमी परिधान में दिखाई देंगे। इसके तहत अर्चकों के लिए रेशमी धोती के साथ उत्तरीय यानी अंगवस्त्र पहनना अनिवार्य होगा। सभी अर्चकों की पोशाक एक जैसी रखी गई है, जिससे मंदिर की सेवा व्यवस्था में एकरूपता नजर आएगी।
धार्मिक मान्यता से जुड़ा है पीला रंग
अर्चकों के लिए पीले रंग का चयन धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखकर किया गया है। हिंदू धर्म में पीला रंग पवित्रता, सात्विकता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में पीला रंग भगवान श्रीराम को प्रिय बताया जाता है। इसी को देखते हुए रामलला के परिधानों के साथ अब अर्चकों की पोशाक में भी पीले रंग को प्राथमिकता दी गई है।
रेशमी वस्त्र से पवित्रता और सात्विकता पर जोर
श्रीराम जन्मभूमि धर्म समिति के सदस्य और वल्लभकुंज मंदिर के महंत राजकुमार दास के मुताबिक, अर्चकों के लिए रेशमी वस्त्र का चयन धार्मिक शुद्धता, पवित्रता और सात्विकता को ध्यान में रखते हुए किया गया है। अब सभी अर्चक निर्धारित परिधान में ही रामलला की नित्य सेवा-पूजा करेंगे।
मंदिर में दिखेगी अनुशासन और एकरूपता की झल
महंत राजकुमार दास के अनुसार, समान पीतांबरी परिधान लागू होने से मंदिर की सेवा-पूजा व्यवस्था में अनुशासन और एकरूपता और अधिक स्पष्ट होगी। साथ ही अर्चकों की पोशाक से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की धार्मिक गरिमा और भव्यता भी उभरकर सामने आएगी।
15 अगस्त से नई व्यवस्था लागू होने के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को रामलला की सेवा में लगे सभी अर्चक एक समान पीले रेशमी परिधान में नजर आएंगे। इससे मंदिर की पारंपरिक और धार्मिक व्यवस्था को एक नया स्वरूप भी मिलेगा।
