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कैंसर के इलाज में बड़ी राहत! सरकार ने 137 दवाओं के मार्जिन पर लगाई लगाम

 
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कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज अक्सर मरीजों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक रूप से बड़ी चुनौती बन जाता है। महंगी दवाओं और अस्पताल के खर्च के कारण कई परिवारों पर भारी बोझ पड़ता है। ऐसे में केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज को किफायती बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने 137 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। इस फैसले से महंगी दवाओं की कीमतों में कमी आने और मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार की ओर से 17 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक, संशोधित कीमतें 9 नवंबर से लागू होंगी। हालांकि, इस फैसले का वास्तविक लाभ मरीजों तक कितना पहुंचेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नए नियमों को किस तरह लागू किया जाता है और उनकी निगरानी कितनी प्रभावी रहती है।

महंगी कैंसर दवाओं की कीमतों पर पड़ेगा असर

इस फैसले के दायरे में ब्रांडेड और जेनेरिक, दोनों तरह की कैंसर रोधी दवाएं शामिल हैं। घरेलू कंपनियों के साथ-साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों की दवाओं पर भी यह व्यवस्था लागू होगी। इनमें कुछ ऐसी दवाएं शामिल हैं, जिनकी कीमत प्रति पैक या शीशी लाखों रुपये तक पहुंच जाती है।

प्रमुख दवाओं में पर्टुज़ुमैब और ट्रैस्टुज़ुमैब का कॉम्बिनेशन, एटेजोलिजुमैब, टेक्लिस्टमैब, इनोटुज़ुमैब ओजोगैमिसिन और डाराटुमुमैब जैसी दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल कैंसर के विभिन्न प्रकारों के इलाज में किया जाता है। ऐसे में इनकी कीमतों पर नियंत्रण से उन मरीजों को राहत मिलने की संभावना है, जिन्हें लंबे समय तक महंगा इलाज कराना पड़ता है।

अस्पतालों में दवाओं की कीमतों पर रहेगी नजर

कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली बड़ी मात्रा में दवाओं की आपूर्ति सीधे अस्पतालों को की जाती है। ऐसे में नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों की भूमिका भी अहम होगी। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि मरीजों से दवाओं के लिए निर्धारित संशोधित कीमतों के अनुरूप ही शुल्क लिया जाए।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर नियंत्रण से अस्पताल में इलाज का कुल खर्च कम होना जरूरी नहीं है। अस्पताल दवाओं पर घटे मार्जिन की भरपाई के लिए मेडिकल सामान, जांच या अन्य प्रक्रियाओं के शुल्क बढ़ा सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों को दवाओं पर तो राहत मिल सकती है, लेकिन उनके कुल मेडिकल बिल में अपेक्षित कमी नहीं आएगी।

कार्डियक स्टेंट की कीमतों पर नियंत्रण से मिला था सबक

इससे पहले वर्ष 2017 में कार्डियक स्टेंट की कीमतों को नियंत्रित किया गया था। उस समय कुछ निजी अस्पतालों में एंजियोप्लास्टी पैकेज की कीमतें बढ़ने की बात सामने आई थी। इस उदाहरण के आधार पर विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं की कीमतों को सीमित करने के साथ-साथ अस्पतालों के अन्य शुल्कों की निगरानी करना भी जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मरीजों को वास्तविक राहत देने के लिए मेडिकल उत्पादों के मार्जिन को तर्कसंगत बनाना और अस्पतालों के बिलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

शेयर बाजार में अस्पताल कंपनियों के शेयरों में गिरावट

सरकार की अधिसूचना के बाद सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर प्रमुख अस्पताल कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। दवाओं पर मार्जिन सीमित किए जाने से अस्पतालों की कमाई पर संभावित असर को लेकर निवेशकों की चिंता इसका एक कारण हो सकती है।

कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला कैंसर के इलाज की लागत कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि नई कीमतों का लाभ मरीजों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है और अस्पतालों के अन्य शुल्कों पर कितनी निगरानी रखी जाती है।