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आगरा की फतेहाबाद सीट से BJP विधायक छोटेलाल वर्मा का निधन, 73 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

 
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आगरा की फतेहाबाद विधानसभा सीट से भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा का गुरुवार देर शाम निधन हो गया। उन्होंने रात करीब 8:30 बजे नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। 73 वर्षीय विधायक पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित थे। दो दिन पहले 22 सितंबर को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें आगरा के उपाध्याय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।

उपाध्याय हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. राजीव उपाध्याय के मुताबिक, छोटेलाल वर्मा को तेज बुखार था और इलाज के दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। गुरुवार को उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल रेफर किया गया। एंबुलेंस से दिल्ली ले जाते समय रास्ते में उनकी हालत और बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

विधायक के बेटे महेंद्र वर्मा ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें सीपीआर भी दिया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

छोटेलाल वर्मा के निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं ने शोक जताया। आगरा के सांसद राजकुमार चाहर ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया।

चार बार विधायक रहे छोटेलाल वर्मा

छोटेलाल वर्मा का जन्म 7 जुलाई 1953 को आगरा में हुआ था। वे मल्लाह (निषाद) समाज से आते थे और अपनी विधानसभा में पिछड़े और कमजोर वर्गों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। राजनीति के साथ-साथ वे खेती और पेट्रोल पंप के कारोबार से भी जुड़े रहे।

उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1993 में भाजपा के साथ की। इसके बाद 2002 में दूसरी बार भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने। वर्ष 2007 में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया, जिसके बाद उन्होंने सपा का दामन थाम लिया और चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। लंबे राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बाद 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले छोटेलाल वर्मा फिर भाजपा में लौट आए। भाजपा के टिकट पर उन्होंने फतेहाबाद सीट से चुनाव जीता और चौथी बार विधायक बने।

विधायकों के निधन से प्रदेश में सात सीटें खाली

छोटेलाल वर्मा के निधन के बाद उत्तर प्रदेश में अब सात विधानसभा सीटें विधायकों के निधन के कारण खाली हो गई हैं। इनमें तीन सीटें सपा, तीन भाजपा और एक सीट बसपा के खाते में थी।

इससे पहले 2 सितंबर को बुलंदशहर की शिकारपुर सीट से भाजपा विधायक और पूर्व राज्य मंत्री अनिल शर्मा का निधन हुआ था। वहीं, 5 अगस्त को बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन हुआ था। 23 जुलाई को आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से सपा विधायक आलमबदी आजमी का निधन हुआ।

इसी साल जनवरी में सोनभद्र की दुद्धी सीट से सपा विधायक विजय सिंह गोंड और बरेली की फरीदपुर सीट से भाजपा विधायक प्रो. श्याम बिहारी लाल का निधन हुआ था। पिछले साल मऊ की घोसी विधानसभा सीट से सपा विधायक सुधाकर सिंह का निधन हुआ था।

हालांकि, इन सीटों पर अब उपचुनाव नहीं होंगे। विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में छह महीने से कम समय बचा होने के कारण इन सीटों को लेकर उपचुनाव की स्थिति नहीं बनती।