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पहले जनगणना, फिर आरक्षण की बात...महिला बिल पर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल

 
 Akhilesh Yadav का हमला: अमेरिका-इजरायल हमलों पर केंद्र की चुप्पी क्यों? बोले– देश में ‘सरकार-शून्यता’ का दौर
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लखनऊ। महिला आरक्षण बिल को लेकर देश में सियासी बहस तेज हो गई है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का आधार ही सही नहीं है और बिना नई जनगणना के इस पर चर्चा करना उचित नहीं है।

“जनगणना के बिना आरक्षण संभव नहीं”

अखिलेश यादव ने कहा कि जब तक देश में नई जनगणना नहीं होती, तब तक महिला आरक्षण की बात करना निरर्थक है। उनका कहना है कि अगर गिनती ही गलत होगी, तो आरक्षण का गणित कैसे सही हो सकता है।

उन्होंने कहा कि आरक्षण का आधार कुल सीटों का एक तिहाई होता है, जो पूरी तरह गणित पर आधारित है, और गणित की नींव सही आंकड़ों पर ही टिकती है।

पुराने आंकड़ों पर सवाल

सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार 2011 की जनगणना के पुराने आंकड़ों के आधार पर महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, जो पूरी तरह गलत है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की वास्तविक संख्या जाने बिना उन्हें आरक्षण देने की बात करना उनके साथ अन्याय और छलावा है।

भाजपा पर साधा निशाना

अखिलेश यादव ने भाजपा पर सीधा हमला करते हुए कहा कि जो सरकार महिलाओं की सही गिनती तक नहीं करना चाहती, वह उन्हें आरक्षण क्या देगी।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक नई जनगणना नहीं होती, तब तक महिला आरक्षण पर बहस नहीं होनी चाहिए।

बिजली व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

महिला आरक्षण के अलावा अखिलेश यादव ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यूपी में एक नई श्रेणी बन गई है- “प्रीपेड पीड़ित”।

उनका कहना है कि जब उपभोक्ता पहले ही बिजली का भुगतान कर देते हैं, तो इसके बावजूद उन्हें परेशान किया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है।

सियासत में बढ़ी हलचल

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद महिला आरक्षण और जनगणना का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना है।