‘अखिलेश यादव गो बैक से लेकर’ ‘माफिया के अखिलेश’ तक, PDA रथयात्रा से पहले रायबरेली में पोस्टर वार
अखिलेश यादव की PDA रथयात्रा के रायबरेली से आगाज से पहले ही जिले का सियासी माहौल गरमा गया है। गुरुवार को शुरू होने वाली रथयात्रा से पहले शहर के साथ-साथ लखनऊ-रायबरेली मार्ग और बछरावां कस्बे के प्रमुख चौराहों पर अखिलेश यादव के खिलाफ पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में सपा प्रमुख पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर निशाना साधा गया है।
बछरावां में लगाए गए पोस्टरों पर बड़े अक्षरों में ‘अखिलेश यादव वापस जाओ’ लिखा गया है। वहीं कुछ पोस्टरों में आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों का इस्तेमाल करते हुए अखिलेश यादव पर सवाल उठाए गए हैं। एक पोस्टर पर लिखा है- ‘आजम खान, अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, यही चलाते थे सरकार’, जबकि इसके नीचे ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ लिखा गया है।
लखनऊ-रायबरेली मार्ग पर लगे दूसरे पोस्टरों में अखिलेश यादव की वैनिटी वैन को लेकर सवाल किया गया है। पोस्टर में लिखा है- ‘अखिलेश जी, रोड पर 20 करोड़ की वैनिटी दौड़ा रहे, ये सड़क किसने बनवाई?’ इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि देने को लेकर भी सवाल उठाया गया है। कुछ पोस्टरों में अखिलेश यादव के लिए ‘गिरगिटेश’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।
बछरावां में लगाए गए ‘अखिलेश यादव वापस जाओ’ वाले पोस्टरों की जिम्मेदारी स्थानीय भाजपा नेता हरिओम चतुर्वेदी ने ली है। पोस्टर सामने आने के बाद सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली है।
रायबरेली से PDA रथयात्रा का आगाज
इन राजनीतिक पोस्टरों के बीच अखिलेश यादव गुरुवार को रायबरेली से अपनी PDA रथयात्रा की शुरुआत करेंगे। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की तैयारियों के लिहाज से इस यात्रा को अहम माना जा रहा है। अखिलेश यादव रायबरेली के GIC मैदान में जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद वह हरचंदपुर के सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर पहुंचेंगे और वहां चाय पर मुलाकात करेंगे।
अखिलेश यादव समाजवादी छात्रसभा के उन कार्यकर्ताओं से भी मिलेंगे, जिनकी 17 सितंबर को ABVP और पुलिस अधिकारियों के साथ झड़प हुई थी। सपा नेताओं के मुताबिक, रथयात्रा के दौरान अखिलेश उन परिवारों से भी मुलाकात करेंगे, जो पुलिस या प्रशासन की कार्रवाई को लेकर नाराज हैं।
पीड़ित परिवारों तक पहुंचने की रणनीति
सपा की योजना इस यात्रा को केवल जनसंपर्क अभियान तक सीमित रखने की नहीं है। पार्टी के मुताबिक, अलग-अलग जिलों में अखिलेश यादव ऐसे परिवारों से भी मिलेंगे, जो किसी पुलिस या प्रशासनिक कार्रवाई से प्रभावित या नाराज हैं।
समाजवादी पार्टी पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण को अपनी राजनीति के केंद्र में रखती रही है। अखिलेश यादव कई मौकों पर कह चुके हैं कि पीड़ित और वंचित वर्ग भी PDA का हिस्सा है। ऐसे में रथयात्रा के दौरान इन परिवारों तक पहुंचने को पार्टी की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
रायबरेली से ही शुरुआत क्यों?
PDA रथयात्रा की शुरुआत के लिए रायबरेली को चुने जाने के पीछे जिले का राजनीतिक समीकरण भी अहम है। 17 सितंबर को सपा छात्रसभा और ABVP कार्यकर्ताओं के बीच हुए विवाद के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर सपा ने विरोध जताया था। अखिलेश यादव का छात्रसभा कार्यकर्ताओं और सपा विधायक राहुल लोधी से मिलना इसी घटनाक्रम से जुड़ा माना जा रहा है।
रायबरेली में पिछले विधानसभा चुनाव का प्रदर्शन भी सपा के लिए महत्वपूर्ण रहा था। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के बिना जिले की पांच में से चार सीटों पर जीत दर्ज की थी। अब पार्टी की नजर ऊंचाहार सीट पर भी है। यहां से सपा के टिकट पर तीन बार चुनाव जीत चुके मनोज पांडेय अब भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
सपा और कांग्रेस के बीच आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच रायबरेली की राजनीतिक अहमियत भी बनी हुई है। ऐसे में रथयात्रा के जरिए सपा अपने संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के साथ ही अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
क्या है PDA रथ?
समाजवादी पार्टी का PDA रथ एक आधुनिक प्रचार वाहन है, जिसके जरिए अखिलेश यादव प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा करेंगे। यात्रा के दौरान पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों से संपर्क पर जोर रहेगा।
रथयात्रा में उन परिवारों तक पहुंचने की भी योजना है, जो पुलिस या प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अपनी शिकायतें रखते हैं। रायबरेली से यात्रा की शुरुआत के साथ ही सपा की 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का एक और चरण सामने आएगा।
