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UP पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, निर्वाचन आयोग से पूछा-  समय पर क्यों नहीं करा रहे...

 
High Court
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर अनिश्चितता के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से सीधे सवाल किया है कि क्या संवैधानिक समयसीमा के भीतर पंचायत चुनाव कराए जा सकेंगे या नहीं?

मंगलवार को इस मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आयोग से चुनाव की तैयारियों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को दोपहर 2 बजे तय की गई है।

याचिका में समयबद्ध कार्यक्रम की मांग

यह मामला याचिकाकर्ता Imtiyaz Hussain द्वारा दायर याचिका के जरिए कोर्ट पहुंचा है। याचिका में मांग की गई है कि जिला पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव प्रक्रिया का विस्तृत और समयबद्ध कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाए।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस Atul Sridharan और जस्टिस Siddharth Nandan की डिवीजन बेंच ने की।

संवैधानिक समयसीमा का मुद्दा

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल पहली बैठक से अधिकतम 5 वर्ष तक ही सीमित होता है। ऐसे में समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग ने दलील दी कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, जो आयोग के परामर्श से जारी होती है।

कोर्ट ने आयोग से मांगी स्थिति स्पष्ट करने को कहा

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आयोग से पूछा कि 19 फरवरी 2026 की अधिसूचना के आधार पर क्या वह चुनाव कराने की स्थिति में है? कोर्ट ने यह भी कहा कि पंचायत चुनाव 26 मई 2026 तक या उससे पहले कराए जाने चाहिए।

2 मई को खत्म हो रहा पंचायतों का कार्यकाल

प्रदेश में पिछला पंचायत चुनाव 2021 में हुआ था। इस आधार पर ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल 2 मई 2026 को समाप्त हो जाएगा। ऐसे में अप्रैल से जून के बीच चुनाव प्रस्तावित हैं।

देरी के पीछे प्रशासनिक कारण

पंचायत चुनाव में देरी के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं—

मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) का काम 27 मार्च तक चलेगा

इसके बाद जनगणना की हाउस लिस्टिंग में प्रशासनिक अमला व्यस्त रहेगा

पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण तय करने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है

राजनीतिक कारण भी अहम

सूत्रों के मुताबिक, राजनीतिक दल भी फिलहाल पंचायत चुनाव जल्द कराने के पक्ष में नहीं हैं। इसकी एक बड़ी वजह आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनाव के नतीजों का असर विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है, जिससे सियासी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

तैयारियों की स्थिति पर उठे सवाल

पंचायतीराज विभाग की ओर से अब तक आरक्षण तय करने के लिए कमेटी का गठन नहीं किया गया है, जबकि यह प्रक्रिया पूरी करने में करीब दो महीने का समय लगता है। इससे साफ है कि चुनाव की तैयारियां अभी शुरुआती चरण में भी नहीं हैं।