मिर्जापुर : आईजीआरएस शिकायत के निस्तारण में फर्जीवाड़ा, गवाहों ने दे दिए फर्जी नाम, दरोगा ने कहा- दबाव है इसलिए...
मिर्जापुर। आइजीआरएस निस्तारण में पहली रैंकिंग आने के बाद निस्तारण में फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। देहात कोतवाली क्षेत्र के बरकछा कलां चौकी पर तैनात दारोगा पर आईजीआरएस की शिकायत के फर्जी निस्तारण का गंभीर आरोप सामने आया है। बरकछा निवासी रामा ने बताया कि उन्होंने फरवरी माह में अपने जमीन विवाद को लेकर आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित का आरोप है कि शिकायत की जांच के लिए चौकी से पहुंचे दारोगा रमाशंकर यादव ने मामले का वास्तविक समाधान किए बिना ही फर्जी तरीके से निस्तारण कर दिया। इतना ही नहीं रिपोर्ट में ऐसे गवाहों के नाम दर्ज कर दिए गए, जिन्होंने कथित रूप से कोई बयान ही नहीं दिया था।
इस संबंध में नामजद गवाह बनाए गए विकास तिवारी ने भी स्पष्ट किया कि उन्होंने इस मामले में किसी प्रकार की गवाही नहीं दी है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पीड़ित रामा का कहना है कि जमीन पर लगातार कब्जा किया जा रहा है, लेकिन पुलिस उनकी सुनवाई नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों का औपचारिक निस्तारण कर दिया जाता है, जबकि वास्तविक समस्या जस की तस बनी हुई है। मामले को लेकर पीड़ित ने दोबारा आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस प्रकरण से पुलिस कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहला मामला
बरकछा निवासी रामा ने जमीन को लेकर फरवरी माह में शिकायत की। शिकायत संख्या 20019926002073 का निस्तारण करने के बाद फर्जी गवाहों के नाम डाल दिए गए। गांव के रहने वाले व्यवसाई विकास तिवारी को दारोगा ने गवाह बना दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई गवाही या प्रकरण संज्ञान में ही नहीं था। गवाह में नाम दिखने के बाद तनाव की स्थिति है।
दूसरा मामला
रामा सोनकर ने दूसरी आईजीआरएस में शिकायत की। शिकायत के बाद 300100026000277 का निस्तारण दारोगा रमाशंकर ने एक बार फिर विकास तिवारी का नाम डाल दिया। उन्होंने बताया कि हमने शिक़ायत करनी चाही तो दारोगा ने कहा कि 100 मामलों में ऐसे ही नाम भेज दिया जाता है। कोई बड़ी बात नहीं है।
एसआईएस रमांशकर यादव ने बताया कि आइजीआरएस निस्तारण में गवाहों का नाम मांगा जाता है. आईजीआरएस सेल से दबाव रहता है। इसलिए प्रतिष्ठित लोगों का नाम भेज देते है। यह बड़ी बात नहीं है। ऐसे ही निस्तारण होता है।
सीओसी मुनींद्र पाल प्रकरण में दारोगा की गंभीर लापरवाही सामने आई है. जांच रिपोर्ट एसपी को प्रेषित किया गया है. उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
