Movie prime

प्रयागराज माघ मेला विवाद : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंनद का बड़ा बयान, बोले- मठ पर लगेगा ‘भाई और कसाई’ का बोर्ड

 
avimukteswaranad
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

प्रयागराज। माघ मेले को लेकर उठे विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंनद सरस्वती और सत्ता पक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर जहां भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं और अलग-अलग धर्माचार्यों ने जांच और न्याय की मांग की है, वहीं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रंवींद्र पुरी और आचार्य Pramod Krishnam ने खुलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समर्थन किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब उनके मठ पर ‘भाई और कसाई’ नाम से एक बोर्ड लगाया जाएगा।

‘समर्थन से हमें आपत्ति नहीं’

सीएम योगी को मिल रहे धर्माचार्यों के समर्थन पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि हर व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अधिकार है। अगर कोई मुख्यमंत्री का समर्थन करता है तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है।

हालांकि उन्होंने दोहराया कि उनका आंदोलन गौ-माता की रक्षा के लिए है और वे इसे धर्मयुद्ध मानते हैं। उन्होंने कहा कि हालिया बयानों के बाद उन्होंने अपने मठ पर एक बोर्ड लगाने का निर्णय लिया है, जिसमें दो श्रेणियां होंगी-एक, जो गौ-माता को मां मानता है, वह ‘भाई’; और दूसरा, जो ऐसा नहीं मानता, वह ‘कसाई’ कहलाएगा।

उन्होंने कहा कि जो लोग अब खुलकर अपनी राय दे रहे हैं, उससे उनकी प्रकृति स्पष्ट हो रही है और भविष्य में उनके साथ कैसा व्यवहार करना है, यह जनता तय करेगी।

‘अपने मुंह मियां मिट्ठू’ वाली टिप्पणी

मुख्यमंत्री के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि अपने यहां कहावत है—‘अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना’। उनका कहना था कि जब कोई व्यक्ति खुद अपनी प्रशंसा करने लगे तो यह कमजोरी का संकेत है। अगर काम प्रभावी ढंग से किए गए होते तो स्वयं तारीफ करने की जरूरत नहीं पड़ती।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य तंज कसना नहीं, बल्कि धर्म के लिए संघर्ष करना है। उनके अनुसार वे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री से जो गलतियां हो रही हैं, वे सुधरें ताकि उनका भविष्य और परलोक दोनों सुरक्षित रहें।

बृजेश पाठक पर भी दिया जवाब

डिप्टी सीएम Brajesh Pathak द्वारा बटुक पूजन के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि जितना उन्होंने किया, वह सराहनीय है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकाल लेना कि पूरा विवाद खत्म हो गया, सही नहीं होगा। जिन लोगों के स्वाभिमान को ठेस पहुंची है, उनके लिए मामला अभी समाप्त नहीं माना जा सकता।

माघ मेले को लेकर चल रही इस जुबानी जंग ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में बहस को और तेज कर दिया है।