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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला,चंपत राय और अनिल मिश्रा की छुट्टी, इस्तीफे पर लगी मुहर

 
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अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को बड़ा फैसला सामने आया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिए गए। चढ़ावा चोरी के मामले के सामने आने के बाद दोनों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे थे। विशेष जांच दल (SIT) की जांच शुरू होने के बाद दोनों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे अब ट्रस्ट ने मंजूरी दे दी है।

बैठक में उठी बदनामी की चिंता

मणिराम दास छावनी में आयोजित ट्रस्ट की बैठक में सदस्यों ने माना कि चढ़ावा चोरी के आरोपों से देशभर में राम मंदिर की छवि प्रभावित हुई है और आस्था रखने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं में चिंता का माहौल बना है।

बैठक के दौरान ट्रस्ट सदस्य दीनेन्द्र दास से कहा गया कि पहले महासचिव और ट्रस्टी के इस्तीफों पर चर्चा पूरी की जाए, उसके बाद अन्य विषयों पर विचार होगा। वहीं, जानकारी के अनुसार गोपाल राव भी बैठक में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अंदर प्रवेश नहीं दिया गया।

"धर्म की रक्षा हमारी पहली जिम्मेदारी"

बैठक में शामिल स्वामी परमानंद गिरी ने कहा कि जब करोड़ों लोगों की आस्था किसी धार्मिक संस्थान से जुड़ी हो, तो छोटी-छोटी बातों का भी विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी के आरोपों से पूरा देश आहत हुआ है और इससे मंदिर की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा है।

बैठक में शामिल नहीं हुए चंपत राय और अनिल मिश्रा

ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा मौजूद नहीं थे। बताया गया कि दोनों को बैठक में शामिल नहीं किया गया। उनके इस्तीफे पर सभी ट्रस्ट सदस्यों ने सर्वसम्मति से सहमति जताई।

हालांकि, दोनों के इस्तीफे स्वीकार होने के बावजूद एसआईटी की जांच जारी रहेगी। जांच एजेंसी दोनों से पूछताछ कर चुकी है और अब आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

नियुक्तियों को लेकर भी हुई चर्चा

बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि ट्रस्ट में पिछले वर्षों में हुई कई नियुक्तियों में चंपत राय और अनिल मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। ऐसे में भविष्य में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने पर भी चर्चा की गई।

अब माना जा रहा है कि ट्रस्ट जल्द ही महासचिव और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियों को लेकर भी निर्णय ले सकता है, जबकि चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की जांच आगे भी जारी रहेगी।