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इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत मिलने पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंनद की पहली प्रतिक्रिया आई सामने, बोले- झूठ की भी ताकत होती है और...

 
Avimukteswranand
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने अगली सुनवाई मार्च के तीसरे सप्ताह में तय की है। तब तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी, हालांकि पुलिस को पूछताछ की अनुमति दी गई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शंकराचार्य को जांच में पूरा सहयोग करना होगा।


शंकराचार्य की प्रतिक्रिया

सुनवाई के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि वह अपने वकीलों से चर्चा करने के बाद ही विस्तृत प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा, “हमें पता था कि झूठ की भी ताकत होती है और सच की भी। झूठ की ताकत परेशान कर सकती है, लेकिन सत्य की ताकत पराजित करने का काम करती है। झूठ की उम्र ज्यादा नहीं होती।”


अदालत की सुनवाई की प्रमुख बातें

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बटुकों के साथ कथित यौन शोषण के मामले में शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी। साथ ही उनके शिष्य मुकुंदानंद की गिरफ्तारी पर भी अंतरिम राहत दी गई है। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी यदि आवश्यक समझे तो पूछताछ कर सकती है, लेकिन जांच प्रक्रिया में सहयोग अपेक्षित रहेगा।

शिकायत और जांच में अंतर पर उठे सवाल

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगी ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह सत्य की जीत है। उन्होंने बताया कि कोर्ट में आशुतोष पांडेय की शिकायत और पुलिस की जांच में कई बिंदुओं पर अंतर सामने आया। शिकायत में दावा किया गया था कि एक बच्चा वर्ष 2024 से आश्रम में बंधक की तरह रह रहा था, जबकि वर्ष 2025 की मार्कशीट में उसे संस्थागत छात्र के रूप में दर्शाया गया है।

मीडिया प्रभारी के अनुसार, अदालत ने इस अंतर को गंभीरता से लिया और इसी आधार पर अंतरिम राहत दी गई।

कोर्ट ने जताई हैरानी

शैलेंद्र योगी ने बताया कि अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि बच्चों को कथित रूप से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के साथ रहने दिया गया। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि शिकायत मिलने के बाद बच्चों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं भेजा गया।

सरकार का रुख

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध नहीं किया गया। सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की जांच जारी है और आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारी की जाएगी। हालांकि मेरिट के आधार पर विरोध करने के बजाय याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाए गए।


फिलहाल अदालत के अंतिम निर्णय तक गिरफ्तारी पर रोक बनी रहेगी और मामले की अगली सुनवाई मार्च के तीसरे सप्ताह में होगी।