तलाक के बाद बेटी लौटी घर…'आई लव माय डॉटर’ टी-शर्ट पहनकर पिता ने किया स्वागत… मेरठ का परिवार बना मिसाल
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो समाज में बदलती सोच और महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल पेश करती है। यहां एक परिवार ने अपनी बेटी के तलाक के बाद उसका स्वागत किसी बोझ की तरह नहीं, बल्कि जश्न के साथ किया।
ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ स्वागत
तलाक के बाद जब बेटी घर लौटी, तो परिवार ने फूल-मालाओं के साथ उसका भव्य स्वागत किया। कोर्ट से घर तक ढोल की थाप पर नाचते-गाते लोग नजर आए और मिठाइयां बांटी गईं।
इस दौरान परिवार के सदस्य काले रंग की टी-शर्ट पहने दिखे, जिस पर बेटी की तस्वीर और “आई लव माय डॉटर” लिखा था।
पिता का भावुक संदेश
रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने बेटी को माला पहनाकर घर में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि 8 साल पहले उन्होंने अपनी इकलौती बेटी प्रणिता की शादी एक आर्मी मेजर से की थी, लेकिन शादी के बाद से ही वह खुश नहीं थी।
उन्होंने भावुक होकर कहा, “अगर मेरी बेटी खुश नहीं थी, तो उसे खुश रखना मेरा फर्ज है। मैं उसे वापस ले आया, बिना किसी एलीमनी या सामान के।”
7 साल की तकलीफ के बाद मिला न्याय
प्रणिता शर्मा की शादी 14 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर निवासी मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष का व्यवहार ठीक नहीं रहा और उन्हें मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया गया।
इस दौरान उनका एक बेटा भी हुआ, लेकिन हालात नहीं सुधरे। आखिरकार उन्होंने मेरठ फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी, जिसे 4 अप्रैल को मंजूरी मिल गई।
महिलाओं को दिया संदेश
प्रणिता, जो एक ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं, ने अन्य महिलाओं को संदेश दिया कि किसी भी तरह की प्रताड़ना को चुपचाप सहना नहीं चाहिए।
उन्होंने कहा, “पहले खुद को मजबूत बनाइए, पढ़िए-लिखिए और अपने पैरों पर खड़ी होइए, तभी सही फैसले ले पाएंगे।”
समाज के लिए सीख
ज्ञानेंद्र शर्मा ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि बेटी कोई बोझ या सामान नहीं होती, बल्कि परिवार का बराबर हिस्सा होती है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि “डोली जाती है, अर्थी ही लौटती है” जैसी सोच को बदला जाए। बेटी को जबरन ससुराल में रहने के लिए मजबूर करना गलत है।
