Movie prime

UP समेत 7 राज्यों में फर्जी टोल कलेक्शन का खेल! ED की 14 ठिकानों पर की छापेमारी, वाराणसी भी रडार पर

 
ED
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

वाराणसी। देशभर में कथित फर्जी टोल कलेक्शन और टोल चोरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एजेंसी ने उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों और एनसीआर में जुड़े 14 ठिकानों पर छापेमारी कर डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों और कथित बेनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की है। इस कार्रवाई में वाराणसी भी जांच के केंद्र में है।

जानकारी के मुताबिक, ED की कार्रवाई उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और एनसीआर से जुड़े ठिकानों पर हुई है। आरोप है कि NHAI के आधिकारिक सिस्टम के समानांतर कथित तौर पर फर्जी या पायरेटेड सॉफ्टवेयर तैयार कर टोल वसूली में हेरफेर किया जा रहा था।

NHAI सिस्टम के समानांतर चल रहा था कथित नेटवर्क

इस पूरे मामले का खुलासा उत्तर प्रदेश STF की जांच के दौरान हुआ था। आरोप है कि कुछ टोल प्लाजा पर वास्तविक टोल कलेक्शन को कम दिखाकर बड़ी रकम का कथित तौर पर गबन किया जा रहा था। जांच में टोल कलेक्शन के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर हेरफेर की आशंका सामने आई।

जांच एजेंसियों के सामने यह आरोप भी आया है कि टोल प्लाजा से वसूली गई रकम का केवल करीब 5 फीसदी हिस्सा सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया जाता था, जबकि बाकी 95 फीसदी रकम कथित तौर पर अलग नेटवर्क के जरिए बांटी जाती थी। हालांकि, इस प्रतिशत और रकम से जुड़े दावों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

फर्जी FASTag से ओवरलोड वाहनों को निकालने का आरोप

जांच में फर्जी FASTag और तकनीकी सिस्टम के कथित दुरुपयोग का पहलू भी सामने आया है। आरोप है कि ओवरलोडेड और कमर्शियल वाहनों को नियमों के मुताबिक टोल वसूली से बचाने के लिए फर्जी एंट्री या FASTag से जुड़े सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था।

जांच एजेंसियों को शक है कि इस पूरे नेटवर्क में टोल संचालकों, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य आरोपियों के बीच कथित तौर पर रकम का बंटवारा होता था। इसी कड़ी में डिजिटल डेटा और बैंक लेनदेन को खंगाला जा रहा है।

वाराणसी से जुड़े आरोपी की भी हुई गिरफ्तारी

इस मामले में वाराणसी से कथित मास्टरमाइंड आलोक सिंह की गिरफ्तारी पहले ही की जा चुकी है। आरोप है कि वह वाराणसी के हरहुआ इलाके में रहकर इस कथित अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहा था। अब ED जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क से पैसा किन लोगों तक पहुंचा और इससे कौन-कौन लोग लाभान्वित हुए।

वाराणसी के लाला नगर टोल प्लाजा से जुड़े करीब 62.87 करोड़ रुपये की कथित स्टांप चोरी के मामले की जांच का पहलू भी सामने आया है।

200 से ज्यादा टोल प्लाजा जांच के दायरे में

जांच एजेंसियों का फोकस अब देशभर के 200 से अधिक टोल प्लाजा तक पहुंच गया है। इनमें उत्तर प्रदेश के करीब 100 टोल प्लाजा भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। ED अब डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों, संपत्तियों और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर कथित घोटाले के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

फिलहाल जांच जारी है और घोटाले की वास्तविक रकम, इसमें शामिल लोगों और कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।