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‘खून की कमी है, BHU ले जाओ’...प्रसव पीड़ा से तड़पती प्रसूता को अस्पताल ने नहीं किया भर्ती, गेट के बाहर बच्चे को दिया जन्म

 
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भदोही। महाराजा चेत सिंह जिला अस्पताल, ज्ञानपुर में प्रसूता को भर्ती न किए जाने और इलाज में लापरवाही के आरोप का मामला सामने आया है। मंगलवार देर रात जोरईं गांव की 20 वर्षीय रानी देवी प्रसव पीड़ा से कराहते हुए स्वजन के साथ जिला अस्पताल पहुंचीं। आरोप है कि अस्पताल में मौजूद स्टाफ नर्स ने खून की कमी बताते हुए उन्हें भर्ती करने के बजाय बीएचयू ले जाने की सलाह दी।

अस्पताल में भर्ती न किए जाने से नाराज स्वजन ने हंगामा किया, लेकिन मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। इसके बाद परिजन प्रसूता को लेकर घर लौटने लगे। इसी दौरान अस्पताल के गेट के बाहर सड़क पर रानी की प्रसव पीड़ा तेज हो गई। हालत देखकर साथ आई महिलाओं ने चादर की ओट में सड़क किनारे ही उसका प्रसव कराया। इसके बाद जच्चा-बच्चा को लेकर परिजन घर चले गए।

पहले भी किया गया था रेफर

परिजनों के मुताबिक, रानी सोमवार को भी जिला अस्पताल आई थीं। चिकित्सक ने जांच के बाद खून की कमी बताते हुए उन्हें मीरजापुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। सरकारी एंबुलेंस से परिजन उन्हें मीरजापुर लेकर पहुंचे, लेकिन वहां भर्ती नहीं किए जाने का आरोप है। इसके बाद वे रानी को लेकर घर लौट आए।

मंगलवार रात दोबारा प्रसव पीड़ा होने पर परिजन सरकारी एंबुलेंस से उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि इस बार भी अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया।

रानी के भाई विजय कुमार ने आरोप लगाया कि अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स नीलम मौर्या ने उनके मुसहर समुदाय से होने का हवाला देते हुए प्रसव कराने से इनकार किया और उन्हें अस्पताल से जाने को कहा। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

जानकारी मिलते ही घर पहुंचे CMO

अस्पताल के बाहर प्रसव होने की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एसके चक ने मामले की जानकारी लेने के बाद रानी के घर पहुंचकर जच्चा-बच्चा को अस्पताल में भर्ती कराया। दोनों को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराकर इलाज शुरू किया गया। चिकित्सकों ने प्रसूता को प्लाज्मा भी चढ़ाया।

पुलिस और पूर्व प्रधान रामधनी यादव ने मौके पर पहुंचकर नाराज परिजनों को समझाया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।

चार सदस्यीय टीम करेगी जांच

पूरे मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम में एसीएमओ डा. ओपी शुक्ल, डिप्टी सीएमओ डा. आरबी पाठक, डा. रामाशीष सरोज और महिला रोग विशेषज्ञ डा. शालिनी पाठक शामिल हैं।

सीएमओ डा. एसके चक ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि महिला और बच्चा चिकित्सकों की 24 घंटे निगरानी में हैं और दोनों की हालत फिलहाल ठीक है।

वहीं, जिलाधिकारी शैलेश कुमार ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि संबंधित नर्स, चिकित्सक और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।