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अहोई अष्टमी पर पहली बार रख रही हैं व्रत? पूजा से पारण तक इन नियमों का रखें ध्यान

अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026 को रखा जाएगा। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, अष्टमी तिथि, तारों के दर्शन का समय, चंद्रोदय और व्रत के दौरान पालन किए जाने वाले जरूरी नियम।

 
अहोई अष्टमी
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अहोई अष्टमी का व्रत इस साल 1 नवंबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुखी जीवन और सफलता की कामना के साथ व्रत रखती हैं और अहोई माता की पूजा करती हैं। व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं और शाम को तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करती हैं। कुछ महिलाएं अपनी मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देकर भी व्रत खोलती हैं। अगर आप पहली बार अहोई अष्टमी का व्रत रखने जा रही हैं, तो पूजा के मुहूर्त के साथ इससे जुड़े जरूरी नियमों को भी जान लें।

अहोई अष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से शुरू होगी। इस तिथि का समापन 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा।

अहोई अष्टमी की पूजा के लिए शुभ समय शाम 5 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 54 मिनट तक निर्धारित है। ऐसे में व्रती महिलाएं इस अवधि में अहोई माता की पूजा कर सकती हैं।

अहोई अष्टमी पर तारों और चंद्रोदय का समय

अहोई अष्टमी के दिन तारों के दर्शन का समय शाम करीब 6 बजे बताया गया है। व्रत रखने वाली महिलाएं तारों को अर्घ्य देने के बाद उपवास का पारण करती हैं। वहीं, चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने वाली महिलाएं अपनी मान्यताओं के अनुसार चंद्रोदय का इंतजार करती हैं।

इस दिन चंद्रोदय रात 11 बजकर 40 मिनट पर होगा। करवा चौथ की तरह अहोई अष्टमी का व्रत भी कठिन माना जाता है। इस दौरान व्रती महिलाएं पूरे दिन जल तक ग्रहण नहीं करती हैं।

अहोई अष्टमी व्रत में किन नियमों का रखें ध्यान?

अहोई अष्टमी के दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को कुछ परंपरागत नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सोने से बचना चाहिए। इसके अलावा काले रंग के कपड़े पहनने से भी परहेज किया जाता है। इस दिन शुभ रंगों के वस्त्र पहनने की मान्यता है।

व्रत के दौरान चाकू, कैंची या दूसरी धारदार चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। तारों या चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही जल या अन्न ग्रहण करने की परंपरा है। व्रत का पारण करने के बाद सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है।

अहोई अष्टमी की पूजा के दौरान व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी जरूरी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कथा के बिना व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। अगर घर की दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाना संभव न हो, तो बाजार में मिलने वाले अहोई माता के कैलेंडर की पूजा भी की जा सकती है।