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Chaitra Navratri 2026 : नवरात्रि की नवमी तिथि पर सिद्धिदात्री देवी और मां लक्ष्मी के दर्शन का विधान, काशी में यहां स्थित हैं देवियों का मंदिर

 
ळक्ष्मी माता
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वाराणसी। चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन धर्मनगरी काशी में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। विशेषकर माता लक्ष्मी के पवित्र स्थल लक्सा स्थित लक्ष्मीकुंड और मैदागिन के गोलघर में स्थित प्राचीन सिद्धिदात्री मंदिर में भक्तों की भीड़ देखने लायक है।

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भोर से ही श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए कतारों में खड़े होकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं और सिद्धि, शांति, सौभाग्य व सुख की कामना कर रहे हैं।

सिद्धिदात्री के दर्शन का विशेष महत्व

नवरात्रि की नवमी तिथि को मां दुर्गा के नवें स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई भक्त पूरे नौ दिन मां के सभी रूपों का दर्शन नहीं कर पाता है, तो नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री के दर्शन कर नौ दिन के पुण्य का फल प्राप्त कर सकता है।

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सहज कृपालु हैं देवी सिद्धिदात्री

पुराणों के अनुसार, मां सिद्धिदात्री का स्वरूप भक्तों पर अनुग्रह करने वाला है। देवी कमल के आसन पर विराजमान होती हैं और उनका वाहन सिंह है। देवी की कृपा से देवता, ऋषि, असुर, नाग और सामान्य जन सभी सिद्धियों को प्राप्त करते हैं।

शास्त्रों में सिद्धिदात्री की महिमा

शिव महापुराण, देवी पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में वर्णित है कि भगवान शिव ने भी सिद्धिदात्री की आराधना कर आठों प्रकार की सिद्धियों को प्राप्त किया था। इसीलिए देवी को सर्वसिद्धि प्रदायिनी कहा गया है और उनका नाम पड़ा सिद्धिदात्री।

गौरी स्वरूप में लक्ष्मी के दर्शन का विशेष दिन

चैत्र नवरात्र की नवमी पर काशी में देवी लक्ष्मी के दर्शन भी विशेष माने जाते हैं। भक्तगण लक्सा के लक्ष्मीकुंड स्थित मंदिर में मां लक्ष्मी के गौरी स्वरूप की आराधना कर रहे हैं।

भक्ति में लीन है काशी

नवमी पर भक्त माता की भक्ति में पूरी तरह रम गए हैं। वे फूल, नारियल, चुनरी और प्रसाद लेकर मंदिरों में दर्शन हेतु पहुंचे हैं। देवी के चरणों में आस्था अर्पित कर वे मानसिक और आत्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं।