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चैत्र नवरात्रि 2026: एक नहीं, तीन-तीन शुभ मुहूर्त ! चैत्र नवरात्र में कब करें कलश स्थापना?

इस वर्ष चैत्र नवरात्र 19 मार्च से दुर्लभ संयोग में शुरू होंगे, जब प्रतिपदा तिथि के क्षय के कारण अमावस्या में कलश स्थापना होगी। काशी में नौ गौरी पूजन की विशेष परंपरा निभाई जाएगी। अष्टमी 26 और नवमी 27 मार्च को पड़ेगी, इसी दिन रामनवमी मनाई जाएगी।

 
Chaitra Navaratri 2026
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Chaitra Navaratri 2026: इस वर्ष चैत्र नवरात्र 19 मार्च से एक दुर्लभ संयोग के साथ प्रारंभ हो रहा है। लगभग नौ दशक बाद ऐसा अवसर आया है, जब प्रतिपदा तिथि के क्षय के कारण अमावस्या तिथि में ही कलश स्थापना की जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह अत्यंत विशेष स्थिति है, जब नववर्ष के दिन प्रतिपदा तिथि का अभाव है और नवरात्र पुराने वर्ष में ही आरंभ हो रहे हैं।

प्रतिपदा तिथि के क्षय से बदला क्रम

सनातन परंपरा में नववर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है, लेकिन इस बार एक संवत्सर के लोप के कारण नवसंवत्सर द्वितीय तिथि से प्रारंभ होगा। इस वर्ष का नाम रौद्र संवत्सर रहेगा। नया विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 होगा। ज्योतिषियों के अनुसार वर्ष के राजा गुरु और मंत्री मंगल रहेंगे।

तीन शुभ मुहूर्त में होगी कलश स्थापना

कलश स्थापना के लिए तीन शुभ समय निर्धारित किए गए हैं-
•    प्रातःकाल: सुबह 6:52 से 7:43 तक
•    अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:10 से 12:59 तक
•    गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:35 से 6:59 तक

19 मार्च को सुबह 6:40 बजे तक अमावस्या तिथि रहेगी, इसके बाद प्रतिपदा प्रारंभ होगी और उसी के बाद कलश स्थापना का विधान होगा।

नौ दिनों तक विराजेंगी मां दुर्गा

नवरात्र के दौरान श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में माता का पूजन कर 15 प्रकार के नैवेद्य अर्पित करेंगे। मां दुर्गा नौ दिनों तक विराजमान रहेंगी। चैत्र अष्टमी 26 मार्च और नवमी 27 मार्च को पड़ेगी। इसी दिन रामनवमी का पर्व भी मनाया जाएगा।

काशी में नौ गौरी पूजन की परंपरा

काशी में चैत्र नवरात्र के दौरान नौ गौरी के दर्शन-पूजन का विशेष महत्व है। पहले दिन गायघाट स्थित मुखनिर्मालिका गौरी और शैलपुत्री माता के दर्शन से शुरुआत होती है। इसके बाद क्रमशः विभिन्न स्थानों पर स्थित गौरी स्वरूपों के दर्शन का विधान है, जो नवमी तक चलता है।

पालकी से होगा माता का आगमन

इस वर्ष माता का आगमन पालकी में माना जा रहा है, जिसे शुभ संकेत माना जाता है। श्रद्धालुओं में इस विशेष संयोग को लेकर उत्साह का वातावरण है।