Hartalika Teej 2026: हरितालिका तीज पर बन रहा दुर्लभ संयोग, एक ही दिन होगी शिव-पार्वती और गणेश की पूजा
हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी इस बार 14 सितंबर को एक साथ पड़ रही हैं। सोमवार के दिन बने इस खास संयोग में शिव-पार्वती और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर सुबह 7:19 बजे से शुरू होकर 15 सितंबर सुबह 7:55 बजे तक रहेगी।
Hartalika Teej 2026: इस बार हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ रही हैं। 14 सितंबर को सोमवार के दिन यह खास संयोग बन रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार तृतीया तिथि के उदयकाल के प्रभाव से हरितालिका तीज और चतुर्थी तिथि में चंद्रमा के उदय के समय गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। ऐसे में इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की एक साथ पूजा का विशेष महत्व माना जा रहा है।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार, 14 सितंबर को महादेव को प्रिय सोमवार के दिन हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी का एक साथ पड़ना खास संयोग है।
शिव-पार्वती की पूजा का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए अन्न और जल त्यागकर कठोर तपस्या की थी। इसी मान्यता से हरितालिका तीज का पर्व जुड़ा है।
सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की इच्छा से हरितालिका तीज का व्रत करती हैं। इस दिन महिलाएं बालू या मिट्टी से भगवान शिव का शिवलिंग बनाती हैं और प्रदोष काल में विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
गणेश चतुर्थी पर होगी गणपति की स्थापना
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को भगवान गणेश के प्राकट्य का पर्व माना जाता है। इस दिन गणपति की स्थापना और पूजा की जाती है। भगवान गणेश को बुद्धि, विद्या और सिद्धि का देवता माना गया है।
संध्या के समय गणेश प्रतिमा की स्थापना कर भगवान गणेश को मोदक और दूर्वा अर्पित किए जाएंगे। धार्मिक मान्यता है कि गणपति की पूजा करने से जीवन के विघ्न और परेशानियां दूर होती हैं।
कब से कब तक रहेगी चतुर्थी तिथि?
पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी की तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:19 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:55 बजे तक रहेगी।
सोमवार के दिन पड़ रही चतुर्थी और हरितालिका तीज के इस संयोग में शिव परिवार की पूजा को विशेष फलदायी माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की संयुक्त आराधना से सुख, शांति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की जा सकती है।
