नवरात्रि 2026: मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की महिमा, जानिए किस दिन किस देवी की होती है पूजा
वाराणसी। हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा के नौ पवित्र स्वरूपों की आराधना को समर्पित होता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों के दौरान मां दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखकर मां दुर्गा की पूजा करता है, उसके जीवन के दुख और कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं।
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं मां के नौ स्वरूपों और उनकी विशेषताओं के बारे में—
पहला दिन: मां शैलपुत्री
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। उन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री और देवी पार्वती का स्वरूप माना जाता है। मां शैलपुत्री नंदी बैल पर सवार रहती हैं और उनके हाथों में त्रिशूल और कमल होता है। उनका प्रिय रंग नारंगी और प्रिय फूल गुड़हल माना जाता है। यह स्वरूप आध्यात्मिक शक्ति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। यह देवी पार्वती का वह स्वरूप है, जब उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। उनका प्रिय रंग सफेद माना जाता है, जो शांति और पवित्रता का प्रतीक है।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। यह देवी साहस और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। मां चंद्रघंटा बाघ पर सवार रहती हैं और उनके हाथों में कई अस्त्र-शस्त्र होते हैं। उनका प्रिय रंग सुनहरा और पीला माना जाता है तथा उन्हें गेंदा और सूरजमुखी के फूल अर्पित किए जाते हैं।
चौथा दिन: मां कूष्मांडा
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि उन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। मां कूष्मांडा सिंह पर सवार रहती हैं और उनकी आठ भुजाएं होती हैं। उनका प्रिय रंग रॉयल ब्लू माना जाता है और उन्हें चमेली के फूल अर्पित किए जाते हैं।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना होती है। उन्हें मातृत्व और करुणा का प्रतीक माना जाता है। वह सिंह पर सवार रहती हैं और अपनी गोद में पुत्र कार्तिकेय को धारण करती हैं। उनका प्रिय रंग पीला माना जाता है और भक्त उन्हें पीले गुलाब अर्पित करते हैं।
छठा दिन: मां कात्यायनी
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। उन्हें शक्ति और वीरता का प्रतीक माना जाता है। यह देवी बुराई के विनाश और धर्म की रक्षा का संदेश देती हैं। उनका प्रिय रंग हरा माना जाता है और भक्त उन्हें गेंदा के फूल अर्पित करते हैं।
सातवां दिन: मां कालरात्रि
सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। यह मां दुर्गा का उग्र रूप है, जो बुराई और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक माना जाता है। वह गधे पर सवार रहती हैं और उनके हाथों में तलवार और वज्र होता है। उनका प्रिय रंग ग्रे माना जाता है।
आठवां दिन: मां महागौरी
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। उन्हें पवित्रता, दया और करुणा का प्रतीक माना जाता है। मां महागौरी बैल पर सवार रहती हैं और उनके हाथों में त्रिशूल और डमरू होता है। उनका प्रिय रंग बैंगनी माना जाता है और उन्हें मोगरा के फूल अर्पित किए जाते हैं।
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री
नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माना जाता है कि वह अपने भक्तों को सिद्धियां और आध्यात्मिक शक्तियां प्रदान करती हैं। मां सिद्धिदात्री कमल के फूल या सिंह पर विराजमान रहती हैं और उनके हाथों में कमल, चक्र, गदा और शंख होते हैं। उनका प्रिय रंग मोरपंखी हरा माना जाता है और उन्हें चंपा के फूल अर्पित किए जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
