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अंतिम सोमवार पर काशी विश्वनाथ के दिव्य रूप के हुए दर्शन, रुद्राक्ष से हुआ श्रृंगार, 5.60 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई हाजिरी

 
kashi vishwnath
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वाराणसी। सावन के अंतिम सोमवार को काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ का भव्य रुद्राक्ष श्रृंगार किया गया। इस खास अवसर पर बाबा की चल प्रतिमा को रुद्राक्ष से सजाया गया और पूरे मंदिर परिसर को रुद्राक्ष की मालाओं से आकर्षक रूप दिया गया। रुद्राक्ष से सजे बाबा विश्वनाथ के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

सावन के चारों सोमवार को बाबा विश्वनाथ का अलग-अलग स्वरूपों में विशेष श्रृंगार किया गया। अंतिम सोमवार का रुद्राक्ष श्रृंगार इन सभी में बेहद खास और आकर्षक रहा। मुख्य गर्भगृह में बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा को विराजमान कराया गया। उनके साथ माता पार्वती भी गर्भगृह में विराजित रहीं। रुद्राक्ष की मालाओं और दानों से सजा पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।

रुद्राक्ष श्रृंगार की तैयारियां सोमवार सुबह से ही शुरू कर दी गई थीं। चल प्रतिमा को सजाने में करीब आठ से दस घंटे का समय लगा। कारीगरों और सेवकों ने बड़ी सावधानी से रुद्राक्ष के दानों को प्रतिमा और पालकी पर सजाया। बाबा की पालकी को सजाने में करीब डेढ़ लाख रुद्राक्ष के दानों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा मंदिर परिसर को भी बड़ी संख्या में रुद्राक्ष की मालाओं और दानों से सजाया गया था।

अंतिम सोमवार को शाम तक करीब 5 लाख 60 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से काशी विश्वनाथ धाम का वातावरण भक्तिमय बना रहा। सावन के अंतिम सोमवार पर बाबा के इस अनोखे रुद्राक्ष स्वरूप ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और भव्य अनुभव कराया।