पितृपक्ष 2026: 26 सितंबर को है भाद्रपद पूर्णिमा, पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए करें इन मंत्रों का जाप
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से भाद्रपद पूर्णिमा के साथ होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पूजा की जाती है। पितृपक्ष के पहले दिन पितरों का स्मरण और स्वागत करने के लिए पितृ गायत्री समेत कुछ मंत्रों के जाप की परंपरा है।
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष की शुरुआत इस साल 26 सितंबर 2026 को भाद्रपद पूर्णिमा के साथ होगी। हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस दौरान पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष के दौरान पितरों का स्मरण करने और उनके निमित्त पूजा-पाठ करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितृपक्ष के पहले दिन पितरों के स्वागत और स्मरण के लिए कुछ विशेष मंत्रों के जाप की परंपरा भी बताई गई है।
पितृ गायत्री मंत्र
पितृपक्ष के पहले दिन पितरों का आवाहन और स्मरण करने के लिए पितृ गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से पितरों के साथ देवताओं और योगियों का भी स्मरण होता है।
मंत्र:
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।।
26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा के दिन श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का जाप करने की परंपरा है।
पितृ प्रणाम मंत्र
पितरों को प्रणाम करने और उनका स्मरण करने के लिए पितृ प्रणाम मंत्र का जाप किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में सुबह इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।
मंत्र:
ॐ सर्वपितृ देवताभ्यो नमः।
इस मंत्र का जाप करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करने की परंपरा बताई गई है। धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है।
जल अर्पण करते समय करें इस मंत्र का जाप
पितरों के निमित्त तर्पण और जल अर्पित करते समय भी एक विशेष मंत्र का जाप करने की परंपरा है। माना जाता है कि इस मंत्र के माध्यम से व्यक्ति अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उन्हें जलांजलि अर्पित करता है।
मंत्र:
ॐ आगच्छन्तु मे पितर एवं गृह्णन्तु जलमंजलिम्।
पितृपक्ष के पहले दिन इस मंत्र का जाप करते हुए पितरों के निमित्त जल अर्पित किया जा सकता है।
पितृदोष से मुक्ति के लिए मंत्र
धार्मिक मान्यताओं में पितृदोष से जुड़े कष्टों के निवारण के लिए भी पितृपक्ष को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान पितरों की शांति के लिए नीचे दिए गए मंत्र का जाप करने की मान्यता है।
मंत्र:
ॐ श्री सर्व पितृ दोष निवारणाय क्लेशं हन् हन् सुख शांतिं देहि फट् स्वाहा।
मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से पितरों की शांति और परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है। पितृदोष से संबंधित धार्मिक उपाय करने वाले लोग पितृपक्ष के दौरान इस मंत्र का जाप करते हैं।
पितृपक्ष में श्रद्धा से करें पितरों का स्मरण
पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। इस दौरान लोग अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं।
26 सितंबर को पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही लोग अपने पूर्वजों का स्मरण कर सकते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर सकते हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या मंत्र जाप की विधि परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अपनाई जा सकती है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक आस्था, मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इन दावों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। धार्मिक अनुष्ठान करने से पहले अपनी परंपरा या योग्य विद्वान से सलाह लेना उचित है।
